धारचूला/ मुनस्यारी/ पिथौरागढ़। मौसम ने सोमवार को फिर करवट बदली। पिथौरागढ़ की व्यास और दारमा से लेकर जोहार घाटी तक में खूब हिमपात हुआ। जिले के निचले इलाकाें में बारिश हुई। हिमपात और बारिश से पूरे जिले में कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है।
सोमवार की सुबह निचले क्षेत्रों में मौसम सामान्य रहा और धूप खिली रही। दोपहर बाद एकाएक बादल घिरने लगे। इस दौरान तेज हवाओं के साथ बारिश होने से धारचूला, अस्कोट सहित कई इलाकों में दिन में ही अंधेरा छा गया। जिले की व्यास घाटी और दारमा घाटी के गांवों में जमकर हिमपात हुआ।
कुटी निवासी बबीता कुटियाल सीपाल ने बताया की आदि कैलाश ज्योलिंगकांग (14,500 फुट) में जमकर हिमपात हुआ है। पार्वती सरोवर में भी बर्फ गिरने से किनारे के हिस्से का पानी जमने लगा है। कुटी, नाबि सहित अन्य गांवों में भी हिमपात हुआ है। इसके अलावा दारमा घाटी में भी बर्फबारी हुई। दारमा घाटी के पंचाचूली शिखर में एक फुट से अधिक बर्फबारी हुई है। इससे पूरे क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है।
30 से अधिक यात्री पहुंचे आदि कैलाश
पिथौरागढ़। सोमवार को 30 से अधिक आदि कैलाश यात्रियों ने भोलेनाथ के दर्शन किए। इसके अलावा 10 से अधिक यात्री बाइक से आदि कैलाश पहुंचे। यहां पहुंचने वाले यात्री बर्फबारी का भी आनंद उठा रहे हैं। यदि मौसम इसी तरह खराब रहा तो अधिक बर्फबारी होने पर अब यात्रियों के लिए आवाजाही में थोड़ी मुश्किल हो सकती है। मौसम खराब होने से माइग्रेशन वाले गांवों के लोग भी घाटियों की ओर लौटने की तैयारियाें में जुट गए हैं। संवाद
खलियाटॉप पर हुई सीजन की पहली बर्फबारी
मुनस्यारी। इस वर्ष अक्तूबर में ही मौसम का मिजाज बदला-बदला नजर आ रहा है। अमूमन नवंबर अंतिम सप्ताह या दिसंबर में बर्फबारी शुरू होती थी। इस बार निचले इलाकों तक भी हिमपात हुआ है। सोमवार को मुनस्यारी के खलियाटॉप में सीजन का पहला हिमपात हुआ। पंचाचूली, हंसलिंग, नागनीधुरा, छिपलाकेदार और खलिया में बर्फबारी से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। मुनस्यारी के लास्पा तक हिमपात की सूचना है। मुनस्यारी में ठंड से बचाव के लिए लोगों ने गर्म कपड़े निकाल लिए हैं। संवाद
ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित
पिथौरागढ़। दिन में हुई तेज बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। इन दिनों गांवों में घास काटने का काम चल रहा है। लगातार दो दिनों से बारिश होने से घास के खराब होने का खतरा बन गया है। बारिश और ठंड के कारण लोग घास नहीं समेट पा रहे हैं। मुवानी घाटी में भी जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। इधर गंगोलीहाट में दिन में दोपहर दो बजे से बारिश का क्रम शुरू हो गया था। इस दौरान बिजली भी गुल रही। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। संवाद
अस्कोट क्षेत्र के लोगों ने अंधेरे में गुजारी पूरी रात
अस्कोट/बंगापानी। खराब मौसम के कारण रविवार की शाम करीब चार बजे गुल हो गई जो अगले दिन सोमवार को सुबह 9:30 बजे बहाल हो सकी। इसके चलते अस्कोट, गर्खा, नारायण नगर, मिर्थी, बगड़ीहाट, सांवलीसेरा, जोग्यूड़ा, बेड़ा, रसगाड़ी, गदाली, मोचोरा, बड़ीगांव, तल्ला मल्ला बगड़, ड्योढ़ा, तीतरी, घिंघरानी, ओड़ीगांव, कूटा, जमतड़ी, सिरतोली, बाजार आदि गांवों के 50 हजार से अधिक लोगों को अंधेरे में रात बितानी पड़ी। ऊर्जा निगम के उपखंड अधिकारी गिरीश आर्या ने बताया कि 33 केवी लाइन में कनालीछीना से डीडीहाट के बीच फाॅल्ट आने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। सोमवार सुबह आपूर्ति बहाल कर दी गई थी। इधर बंगापानी क्षेत्र के लगभग 40-45 गांव रविवार शाम से अंधेरे में डूबे रहे। बिजली नहीं होने से कई लोगों के मोबाइल फोन भी बंद हो गए। संवाद
इनसेट
काश्तकारों ने उठाई मुआवजा देने की मांग
अस्कोट। रविवार को हुई ओलावृष्टि से क्षेत्र के फल उत्पादकों को भारी नुकसान पहुंचा है। खोलिया गांव के इंद्र बहादुर पाल, सूनाकोट, बाराकोट के राम सिंह खोलिया, शेर सिंह धामी, हर सिंह, नर सिंह, माधव सिंह, मोहन राम आदि किसानों ने बताया कि सीजन में एक से दो लाख के बीच, संतरा, माल्टा, नींबू, चूख, पपीता, आंवला, अमरूद, मूली, गाजर, गोभी आदि बेच कर परिवार का पालन करते थे। ओलावृष्टि ने सब खत्म कर दिया है। कुछ फल पेड़ों में बचे हैं उनमें ओलों से दाग पड़ गया है। डोकुना के सामाजिक कार्यकर्ता डीपी पोखरिया, अस्कोट क्षेत्र के ग्रामीण एकता मंच के तरुण पाल ने राजस्व विभाग से मुआयना कर मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा फूलों से आजीविका चलाने वाले लोग भी निराश हैं। कई जगहों पर फूल पौधों सहित नष्ट हो गए हैं। संवाद
बारिश से चंपावत में भी तापमान गिरा
चंपावत/टनकपुर/बनबसा। जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में दोपहर बाद हुई बारिश के कारण तापमान में गिरावट आ गई और ठंड काफी बढ़ गई है। सर्दी के मौसम की पहली बारिश से लोगों ने गरम कपड़े निकाल लिए हैं। कई स्थानों पर लोगों ने ठंड से बचाव के लिए हीटर और अंगीठी का सहारा लिया।
चंपावत में सोमवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 डिगी सेल्सियस रिकाॅर्ड किया गया। इधर बारिश की वजह से बारिश से किसानों के चेहरों पर मायूसी है। खेतों में काटकर रखी गई धान की फसल भीगने से खराब होने के कगार पर पहुंच गई है। राज्य बागवाली पुरस्कार प्राप्त प्रगतिशील किसान क्षेत्र पंचायत सदस्य पुष्कर कापड़ी ने इस बारिश को किसानों के लिए नुकसानदायक बताया है। संवाद