देवकाली देवी अपने बेटे उद्घव के साथ।
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धारचूला (पिथौरागढ़)। लॉकडाउन के कारण धारचूला में रह रहे सैकड़ों नेपाली नागरिकों में 12 नेपाली महिलाओं और सात बच्चों को भी एक माह तक घर वापसी का इंतजार करना पड़ा। जब लगभग 35 दिन बाद नेपाल को रवाना हुए तो नेपाली नागरिकों ने भारत-नेपाल जिंदाबाद के नारे लगाए। जीजीआईसी बरम राहत शिविर में अम्भाकला अपनी आठ माह की बेटी माया, पति हरक बहादुर और तीन बच्चों के साथ एक माह से रह रही थी। वापसी के समय सभी भावुक दिखे। उन्होंने भोजन और ठहरने के प्रबंध के लिए भारत सरकार और प्रशासन का आभार जताया। शिविर में रह रही चार माह की गर्भवती देवकाली देवी अपने पति और दो बच्चों के साथ अपने घर लौटी। उसने अच्छी व्यवस्था के लिए एनएचपीसी और स्थानीय प्रशासन की जमकर प्रशंसा की। नेपाल के तिंकर गांव की जयंती देवी अपने पति रतन सिंह तिंकरी के इलाज के लिए भारत आई थी लॉकडाउन के कारण एक महीने से भारत मे फंस गयी। गुरुवार को पुल खुलने के बाद नेपाल जा पाने से राहत की सांस ली। उपजिलाधिकारी अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि केंद सरकार की अनुमति मिलने के बाद शिविर में रह रहे 794 नेपाली मजदूरों के साथ स्थानीय फंसे 164 लोग सहित कुल 958 लोग नेपाल लौटे। इस मौके पर एसएसबी के अधिकारी बीएन पांडेय, थानाध्यक्ष विजेंद्र शाह, उपजिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा, सीओ विमल कुमार, नायब तहसीलदार मनीषा बिष्ट, थानाध्यक्ष अशोक धनकड़ मौजूद रहे।