धारचूला (पिथौरागढ़)। चीन सीमा के गांवों को जोड़ने वाली तवाघाट-लिपुलेख सड़क पांचवें दिन भी यातायात के लिए नहीं खुल पाई। यदि मौसम सही रहा तो सड़क खुलने में दो दिन का समय और लग सकता है। सड़क बंद होने से व्यास घाटी के ग्रामीण परेशान हैं। घाटी के ग्रामीणों ने शीघ्र सड़क को खोलने के लिए एसडीएम दिवेश शाशनी को ज्ञापन सौंपा।
धारचूला से ऊपर दोबाट, ऐलागाड़ व कूलागाड़ के साथ ही मलारी व मलघाट पर भी सड़क मलबा और बोल्डर आने से बंद है। बुधवार को पूर्व पालिकाध्यक्ष अशोक नबियाल और आदि कैलाश टैक्सी ऑनर्स सोसायटी के अध्यक्ष प्रवेश नबियाल के नेतृत्व में लोगों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त से सितंबर तक व्यास घाटी के सातों गांवों में पूजा शुरू होने वाली है।
कहा कि वर्तमान में सड़क की दशा बेहद खराब है। सड़क खोलने में जुटी कार्यदायी संस्थाएं मशीन में डीजल नहीं होने की बात कह रहीं हैं। ऐसे में पूजा में शामिल होने के लिए बाहर से आने वाले लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने शीघ्र सड़क को खोलने की मांग की। वहां आमोद सिंह, विनोद, प्रशांत सिंह, राजेंद्र सिंह, सत्यवान सिंह, संजय गुंज्याल, हरीश कुटियाल, देवेंद्र सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।
इधर धारचूला में रोंग्ती पुल तक सड़क खुल गई है। वाहन स्वामी देवेंद्र बुढ़ाथोकी ने बताया कि तवाघाट तक सड़क बंद होने से ग्रामीण रोजमर्रा की चीजों के लिए पैदल चलने को विवश हैं। हिलवेज कंपनी के पीआरओ त्रिलोक सिंह दानू ने बताया कि रात में लगातार बारिश होने के चलते पहाड़ से रोज मलबा और बोल्डर गिर रहे हैं। बताया कि मौसम सही होने पर दो दिन में धारचूला से तवाघाट सड़क पूरी तरह खुल जाएगी।
भूस्खलन में ढह गया गांव को जोड़ने का एकमात्र पैदल रास्ता
बंगापानी (पिथौरागढ़)। तहसील के ग्रामसभा आलम-दारमा के तोक आलम को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला पैदल मार्ग आपदा की जद में आ गया है। सड़क विहीन गांव का एकमात्र पैदल रास्ता भूस्खलन से ढह गया है। यहां वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिए भी जगह नहीं है। इसके चलते आलम तोक की लगभग 250 की आबादी को रोजमर्रा के सामान के लिए भी 20 किमी की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ेगी। रास्ता ध्वस्त होने की
ग्रामीणों की ओर से रास्ता ध्वस्त होने की सूचना पर राजस्व उपनिरीक्षकों की टीम मौका मुआयना करने के लिए गांव रवाना हुई। रास्ते में जगह-जगह पत्थर गिरने और दुर्गम चट्टान के लिए उनका गांव तक पहुंचना मुश्किल हो गया। इसके चलते टीम वापस आ गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द रास्ता नहीं बनाया गया तो समस्या काफी बढ़ सकती है। आपदाग्रस्त गांव और बारिश का मौसम होने से ग्रामीण भयभीत हैं। ऐसे में गांव में कोई बीमार हो गया तो बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है। संवाद
मलबा और बोल्डर आने से जिले की 23 सड़कें बंद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में लगातार हो रही बारिश से चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-लिपुलेख सड़क के साथ ही जौलजीबी-मुनस्यारी, रामंगापुल-मुनस्यारी, तवाघाट-सोबला, पिथौरागढ़-तवाघाट, तवाघाट-घट्टाबगड़, देवलथल-कनालीछीना और तवाघाट-थानीधार सड़क भूस्खलन व मलबा आने से बंद हैं। इनके अलावा बांसबगड़-रायाबजेता, रसियापाटा-मोडी, मालकोट-लोध, ड्योड़ा-बारमो, देवविचौना-गराली, डीडीहाट-हुनेरा, मसूरीकांठा-होकरा, बांसबगड़-कोटा-पंद्रहपाला, मदकोट-तोमिक, छिरकिला-जम्कू, कालिका-खुमति, डोर-सैंणरांथी, मुनस्यारी-हरकोट, नाचनी-भैंसकोट और गलाती-रमतोली-धामीगांव सड़कें मलबा, बोल्डर आने से बंद हैं। ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें बंद होने से लोगों को आवाजाही में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संवाद
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889.30 मीटर पर बह रही काली नदी
पिथौरागढ़। सीमांत क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से काली नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। धारचूला में काली नदी चेतावनी स्तर 889 मीटर को पार कर 889.30 मीटर पर बह रही है। नदी का खतरे का निशान 890 मीटर पर है। बढ़ते जल स्तर को देखते हुए प्रशासन से लोगों से नदी किनारे नहीं जाने की चेतावनी दी है।
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कहां कितनी बारिश (मिमी में)
पिथौरागढ़ 15.5
डीडीहाट 10
गंगोलीहाट 9
बेड़ीनाग 30.2
धारचूला 23.8
मुनस्यारी 62.4