तराई के जंगलो से हिमालय की बुग्यालों में जाते भेड़। संजू पंत डीडीहाट
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संजू पंत (संवाद)
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। अमेरिका में बाघ में कोरोना के लक्षण मिलने वाली खबर के बाद से तराई क्षेत्र से लौट रहे भेड़ पालको के माथे पर चिंता की लकीर देखी जा रही हैं। डीडीहाट नगर से सुबह 4 बजे से भेड़ों के झुंड के झुंड उच्च हिमालयी क्षेत्रों के बुग्यालों में जा रहे हैं। भेड़ पालक विक्रम सिंह ने बताया सभी भेड़ पालक अपनी भेड़ बकरी के साथ जाड़ो में तराई के खटीमा, झनकट के इलाकों में रहते हैं। परंतु इस बार मार्च आखिर में कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के चलते सभी भेड़ पालक जल्दी से जल्दी पहाड़ों को आने लगे। 700 से 1000 के झुंड वाली इन भेड़ बकरी को तराई भाबर से यहां पहुचने में ही 10 दिन का पैदल सफर तय करना पड़ता है। भेड़ पालकों को अब यह डर सता रहा है कि अगर अमेरिका की तरह भारत में भी जानवरों में कोरोना की शिकायत आ गई तो उन्हें भारी नुकसान पहुंच सकता है। कई भेड़ पालक अपने तय समय अप्रैल के अंतिम सप्ताह से एक माह पूर्व ही हिमालयी बुग्यालों के लिये तराई को छोड़कर आ गए हैं। जबकि इस बार हिमालयी क्षेत्रों में काफी लम्बे समय तक बर्फबारी होने के कारण अभी रास्ते नहीं खुल पाए हैं। अभी कुछ समय तक भेड़ पालको व उनके चारवाहों ने अपना आशियाना सिराकोट व आदिचौरा के जंगलों को बना लिया है।