पिथौरागढ़। शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार के लिए चयनित आठगांव शिलिंग के बुंगा निवासी दमयंती चंद ने अध्यापन से इतर भी कई काम किए हैं। उन्होंने न केवल गरीब बच्चों की मदद की बल्कि उनके परिवार वालों की भी सहायता की है।
अटल उत्कृष्ट राइंका बड़ाबे में 14 वर्ष से तैनात शिक्षिका दमयंती चंद ने विद्यालय में बालिकाओं के लिए शौचालय बनाया, चहारदीवारी का निर्माण कराया। अपने संसाधनों से पुस्तकालय के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराईं। वह गरीब बच्चों को न केवल पाठ्य सामग्री मुहैया करातीं हैं बल्कि उन्हें स्कूल ड्रेस (स्वेटर, जूते, मोजे आदि) भी देतीं हैं। निर्धन बच्चों के घर में कोई समस्या होने पर वह उनके परिवार वालों की आर्थिक मदद भी करतीं हैं।
उनका मानना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। बालिकाओं को हर हाल में पढ़ाया जाना चाहिए। चंद ने बताया कि उनका मायका अस्कोट में हैं। बचपन में ही पिता के निधन के बाद मां रेवती पाल ने उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। केंद्र सरकार की नौकरी में तैनात भाई प्रेम पाल समेत चारों भाइयों ने पढ़ाई में हर संभव उनकी मदद मदद की।
उन्होंने नारायण नगर से 12वीं और स्नातक किया। शादी के बाद ससुर शेरी चंद और पति विक्रम चंद ने उन्हें बीटीसी कराई। बताया कि उनकी बेटी नमिता ने बीटेक किया है और वह भी विद्यालय में बच्चों की मदद के लिए सहयोग करती है। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय परिजनों, स्कूल स्टाफ और क्षेत्र के लोगों को दिया।
निर्धन परिवारों के बच्चों के कपड़े भी धोतीं थीं दमयंती
पिथौरागढ़। दमयंती चंद प्राथमिक विद्यालय सिमलकोट में 14 वर्ष तक रहींं। वहां उन्होंने निर्धन बच्चों के सिर से जुएं तक निकाले। वह गंदे कपड़े पहनकर स्कूल आने वाले निर्धन परिवारों के बच्चों के कपड़े भी धोतीं थीं और अपने बच्चों के साफ सुथरे कपड़े उन्हें पहनातीं थीं।