पिथौरागढ़। नगर के ज्ञान प्रकाश संस्कृत पुस्तकालय में मानव-वन्यजीव संघर्ष विषय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि प्राचीन काल से राजा-महाराजाओं ने वीरता का प्रदर्शन करने के लिए साहसिक खेल के तौर पर वन्यजीवों का शिकार शुरू किया जिसे भारत में ब्रिटिश शासन काल में अंग्रेज अफसरों ने भी जारी रखा। उन्होंने कहा कि आज वन्यजीवों का शिकार ही मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रमुख कारण बना है। डॉ. पीतांबर अवस्थी ने कहा कि जंगलों में भोजन कम होने से वन्यजीव आबादी में पहुंच रहे हैं। अवैध शिकार से वन्यजीवों की खाद्य श्रृंखला प्रभावित हो रही है। ऐसे में वन्यजीवों की रक्षा करना जरूरी है। संचालन काजल नेगी ने किया। वहां डॉ. आनंदी जोशी, मंजुला अवस्थी, जयमाला देवलाल, लक्ष्मी आर्या, अनीता जोशी आदि थे।