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पलायन प्रभावित गांवों में आजीविका के लिए बनेंगी योजनाएं

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दिनेश अवस्थी (संवाद) पिथौरागढ़। सीमांत जिले के 50 फीसदी से अधिक पलायन प्रभावित गांवों में आजीविका के संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। साथ ही रिवर्स पलायन के लिए लोगों को मानसिक रूप से तैयार किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न विभागों के अधिकारी गांवों का भ्रमण कर योजनाएं बनाने में जुटे हैं। अधिकारी दो-तीन दिन में रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौपेंगे। उत्तराखंड पलायन आयोग ने 50 फीसदी से अधिक पलायन प्रभावित गांवों में आजीविका के संसाधन उपलब्ध कराने को सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। जिले में 41 गांव ऐसे हैं जिनमें काफी पलायन हुआ है। इनमें से सर्वाधिक गंगोलीहाट ब्लॉक के 25 गांव हैं। बेड़ीनाग के 12, कनालीछीना व मूनाकोट के दो-दो गांव शामिल हैं। साथ ही बेड़ीनाग और गंगोलीहाट के दो-दो गांव तो शून्य जनसंख्या वाले हैं, जो ग्रामीण इन गांवों में हैं वह बने रहे उनके लिए विभिन्न योजनाओं के जरिए आजीविका के संसाधन उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी गोस्वामी ने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी वंदना के निर्देश पर अधिकारियों ने अपने विभागों के प्रोजेक्ट सौंपे हैं। इन योजनाओं को धरातल पर उतार ग्रामीण कितना लाभांवित होंगे इसका सत्यापन करने को 25 विभागीय अधिकारी पलायन प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर रहे हैं। कोरोना के चलते वापस गांव लौटे युवाओं से भी वार्ता कर उन्हें आजीविका से जोड़ने की कवायद की जा रही है।--बटगेरी में औद्यानिकी की संभावना तलाशी पिथौरागढ़। मुख्य उद्यान अधिकारी आरएस वर्मा बुधवार को पलायन प्रभावित गणाई के बटगेरी गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि गांव में लोग आजीविका के लिए क्या करना चाहते हैं। गांव में बच्चे कितने हैं, स्कूल है या नहीं, स्वास्थ्य की सुविधा क्या है। कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन आदि संभावनाओं पर ग्रामीणों की राय जानी गई। दिनेश
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