पिथौरागढ़। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने राज्य में बिजली की दरों के प्रस्ताव पर जन सुनवाई की। इस दौरान उपभोक्ताओं ने टैरिफ में वृद्धि के प्रस्ताव का विरोध किया।
जिला पंचायत सभागार में हुई जन सुनवाई में आयोग के अध्यक्ष डीपी गैरोला और सदस्य मनोज कुमार जैन ने बताया कि राज्य की विद्युत कंपनियों यूपीसीएल, पिटकुल, यूजेवीएन लि. और एसएलडीसी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 की बिजली की दरों में 28.57 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग के समक्ष रखा है। उपभोक्ताओं के सुझाव एवं आपत्तियों को सुनने के बाद आयोग की दरें निर्धारित की जाएंगी। नई दरें एक अप्रैल से लागू होंगी।
उपभोक्ता उमाकांत द्विवेदी, मनोज चौहान, अधिवक्ता टीएन पंत, नीरज गुरुरानी, चंद्रशेखर, दिनेश कापड़ी, कैलाश चंद्र पुनेठा, गिरीश जोशी ने कहा कि विभाग इन दिनों एडिशनल सिक्योरिटी के नाम पर उपभोक्ताओं का उत्पीड़न कर रहा है। उपभोक्ताओं ने बिजली की दरें बार-बार बढ़ाने, सरचार्ज समेत अन्य कर उपभोक्ताओं पर लगाने का विरोध किया।
शमशेर महर, सुशील खत्री, हेमंत बिष्ट, मोहन भट्ट, विपिन चंद्र जोशी, अजय प्रसाद ने कहा कि पहाड़ पर बिजली उत्पादन कर दूसरे राज्य को आपूर्ति की जाती है लेकिन यहां इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। सुबोध बिष्ट, विक्रम सिंह ने भी बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध कर लिखित और मौखिक सुझाव दिए।
सुनवाई में कुल 18 उपभोक्ताओं ने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं। इस मौके पर सचिव नीरज सती, रजनीश माथुर, दीपक पांडे, प्रभात किशोर डिमरी, दीपक कुमार, बार संघ के अध्यक्ष मोहन चंद्र भट्ट, टीएन पंत, गोविंद सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे।
जर्जर पोल, झूलते तार की शिकायत
पिथौरागढ़। उपभोक्ताओं ने आयोग के समक्ष पिथौरागढ़ शहर और ग्रामीण इलाकों में जर्जर पोल, झूलती तारें, लॉपिंग न होने से करंट के खतरे की समस्या उठाई। कहा कि विभाग इस दिशा में ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों के घरों के ऊपर से कनेक्शन की तारें खींचने, बिजली के पोलों के बीच लंबी दूरी होने, बार-बार बिजली गुल होने, लंबी कटौती आदि की शिकायत भी दर्ज कराई।