पिथौरागढ़। सीमांत जिले में लंबे समय ट्रामा सेंटर के निर्माण की योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। ट्रामा सेंटर का निर्माण प्रस्ताव तक ही सीमित रह गया है। ट्रामा सेंटर नहीं होने से घायलों को 200 किमी दूर हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके बाद भी शासन आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील पिथौरागढ़ जिले में ट्रामा सेंटर खोलने के लिए गंभीर नहीं है।
पिथौरागढ़ जिले में लंबे समय से ट्रामा सेंटर की आवश्यकता महसूस हो रही है। एक साल पूर्व स्वास्थ्य विभाग ने बेड़ीनाग में 12 बेड का ट्रामा सेंटर निर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन अभी तक उसे स्वीकृति नहीं मिल पाई है। ट्रामा सेंटर नहीं होने से जिले के दूरदराज के क्षेत्रों में सड़क हादसों में घायल मरीजों को लंबा सफर तय कर जिला अस्पताल लाना पड़ता है।
गंभीर घायलों का यहां प्राथमिक उपचार करने के बाद उन्हें 200 किमी दूर हायर सेंटर हल्द्वानी रेफर करना किया जाता है। कई गंभीर घायल सफर के दौरान ही रास्ते में दम तोड़ देते हैं। ब्रिडकुल के जेई सुरेश चंद्र भट्ट का कहना है कि एक माह पूर्व बेड़ीनाग में ट्रामा सेंटर निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। जिसे स्वीकृति का इंतजार है।
इन क्षेत्रों को होगा लाभ
बेड़ीनाग में ट्रामा सेंटर खुलने से थल, गणाई गंगोली, गंगोलीहाट सहित बागेश्वर जिले के मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। साथ ही क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार होगा।
धारचूला और मुनस्यारी के केंद्र में बनना चाहिए ट्रामा सेंटर
पिथौरागढ़। एक साल पूर्व जब स्वास्थ्य विभाग ने बेड़ीनाग में ट्रामा सेंटर खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। तब कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। लोगों का कहना है कि ट्रामा सेंटर आपदा की दृष्टि से संवेदनशील मुनस्यारी, धारचूला, डीडीहाट और कनालीछीना क्षेत्र के बीच में बनना चाहिए। यहां ट्रामा सेंटर बनने से आपदा और अन्य हादसों में घायल लोगों को तत्काल उपचार मिल पाएगा। बेड़ीनाग में ट्रामा सेंटर बनने से यहां से घायलों को उल्टा बेड़ीनाग ले जाना पड़ेगा। इससे घायलों को समय पर उपचार नहीं मिल सकेगा। संवाद
पिथौरागढ़ जिले में ट्रामा सेंटर निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जिसे अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
- डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ पिथौरागढ़।