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सुकौली में तेंदुआ ने मनोरोगी युवक पर हमला कर मौत के घाट उतारा

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संवाद न्यूज एजेंसी पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत गणकोट के सुकौली में तेंदुआ ने मानसिक रूप से बीमार युवक को मार डाला। इस घटना के बाद पपदेव, बड़ौली, पौण, बजेटी क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों की मांग पर वन विभाग ने पिंजरा लगा दिया है। मणेगांव निवासी बब्बू धामी मानसिक रूप से बीमार था। वह शहर की सड़कों में घूमता रहता था। पिछले कुछ समय से वह सुकौली में खुले में ही सो जाता था। सोमवार की रात तेंदुए ने उसे अपना निवाला बना लिया। मंगलवार की सुबह सुकौली में घूमने जा रहे युवाओं ने उसका क्षत विक्षत शव पड़ा देखा। तेंदुए ने कई स्थानों से युवक के शरीर का मांस खाया था। घटना की जानकारी गणकोट के प्रधान नीरज कुमार ने पुलिस को दी। जिसके बाद कोतवाल रमेश तनवार के नेतृत्व में एसआई मनोज कुमार और पुलिस जवान मौके पर पहुंचे। कोतवाल ने बताया कि युवक के सिर और गर्दन पर तेंदुए के दांतों के निशान थे। तेंदुए ने पेट से नीचे और एक पैर के हिस्सा को खाया था। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। -------------- तेंदुआ के आदमखोर होने की आशंका पिथौरागढ़। तेंदुए के युवक को मारने के बाद लोगों को डर सताने लगा है। ग्रामीणों ने कहा कि उसके मुंह में खून लग गया है। ऐसे में वह फिर से यहां पर अपने शिकार(शव) को लेने फिर आएगा। जिससे खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों को डर है कि तेंदुआ दोबारा इस स्थान पर आ सकता है। उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में पिंजरा लगाने के साथ ही वन कर्मियों के गश्त की मांग की है। --------- तेंदुआ घसीट कर पौंण क्षेत्र में ले गया शव पिथौरागढ़। तेंदुआ युवक को गणकोट ग्राम में मारने के बाद घसीट कर पौण ग्राम की सीमा में ले गया। लेकिन दीवार होने के कारण तेंदुआ युवक के शव को जंगल की तरफ नहीं ले जा पाया। जिसके बाद वहां पर ही कुछ हिस्सा खाने के बाद उसे छोड़कर जंगल की तरफ चला गया। ------------ गांव के युवकों ने प्रधान को दी घटना की जानकारी पिथौरागढ़। गणकोट गांव के युवाओं ने प्रधान को दी घटना की जानकारी। गांव के कुछ युवा तड़के रोज की तरह दौड़ लगाने के लिए निकले। इस दौरान उन्होंने सुकौली के पास खून के धब्बे देखे। धब्बों का पीछा करते हुए वह शव तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने घटना की जानकारी प्रधान को दी। ------------ वन विभाग ने क्षेत्र में लगाया पिंजरा पिथौरागढ़। घटना की जानकारी मिलने के बाद रेंजर डीसी जोशी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने घटना स्थल की जांच करने के बाद ग्रामीणों से देर शाम को घर से नहीं निकलने की अपील की। जिसके बाद देर शाम को पिंजरा लगाया गया। ------------- मानसिक रूप से बीमार था युवक पिथौरागढ़। तेंदुआ के हमले में मारा गया युवक मानसिक रूप से बीमार था। वह पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में ही रह रहा था। रोज की तरह सोमवार की रात वह उसी सड़क पर सो गया। लेकिन उसकी यह रात आखिरी राहत साबित हुई। शिकार की तलाश में जंगल से आए तेंदुआ ने आसान शिकार समझकर युवक को मौत के घाट उतार दिया। घटना स्थल पर युवक की उतरी चप्पलें इस बात की ओर इशारा कर रही थी कि युवक रात में इन्हें उतार कर सोया था। वह रात में मदद के लिए चिल्लाता रहा होगा। लेकिन अंधेरे के आगोश में गुलदार ने उसकी आवाज को हमेशा के लिए शांत कर दिया। वह नगर क्षेत्र में कई समय से यहां वहां घूमता रहता था। ---------------------- सितंबर 2019में तेंदुआ ने महिला को बनाया था शिकार पिथौरागढ़। पपदेव क्षेत्र में तेंदुआ का 2019 में बड़ा आतंक रहा। जिसके बाद शिकारी जॉय हुकिल ने 4अक्टूबर की रात तेंदुआ को मौत के घाट उतारा था। पपदेव क्षेत्र में मोस्टामानू मेले से घर वापस लौट रही महिला पर 3सितंबर 2019 को तेंदुआ ने हमला कर उसे मौत के घाट उतारा है। जिसके ग्रामीणों ने तेंदुआ को आदमखोर घोषित करने की मांग की थी। इसी गांव में तेंदुआ ने 3अगस्त को घर में घुसकर पांच वर्षीय बालक के चेहरे पर पंजा मार उसे जीवन भर के लिए घाव दिया। पपदेव, पौण क्षेत्र में तेंदुआ अक्सर दिखाई देता है। लेकिन 2019 में पपदेव गांव में तेंदुआ की दहशत के कारण लोग रात को भी डंडे लेकर पहरेदारी करते नजर आए थे। घर की महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग घर से बाहर निकलने से बचते थे। उस समय तेंदुआ किसी भी वक्त गांव में घुस जाता था। जिस कारण लोगों की रात की नींद उड़ गई थी। लेकिन शिकारी जॉय हुकिल की बंदूक से निकली गोली के बाद गुलदार हमेशा के लिए मौत की नींद सो गया। जिसके बाद यहां पर शांति रही। लेकिन 2020 में पिछले कुछ माह तेंदुआ ने पौण, पपदेव गांव में ग्रामीणों के मवेशियों को अपना निवाला बनाया। हालांकि लोगों पर तेंदुआ ने हमले कम किए। -------------------- पांच साल में सात लोग बने तेंदुआ का शिकार पिथौरागढ़। जंगल में कम होते शिकार के बाद तेंदुआ ने आबादी वाले क्षेत्रों में आसानी शिकार की तलाश में अपना रुख किया। पिछले पांच साल में तेंदुआ ने छह लोगों को शिकार बनाया। 2014-15 में डीडीहाट रेंज में चार लोगों को अपना शिकार बनाया। 2016-17 में गैला में 12 वर्ष के बच्चे को अपना शिकार बनाया था। 2018 में चौना में हल्द्वानी से अपने घर आ रहे पांच साल के बच्चे तेंदुआ ने शिकार बनाया। 2019में तेंदुआ ने पपदेव में एक महिला पर हमला कर उसे अपना निवाला बनाया था। जिले में पांच साल तेंदुआ के हमलों में पांच सौ से अधिक लोग घायल हुए। --------------- 1988 में गोरंगघाटी के 14लोगों को बनाया था निवाला पिथौरागढ़। तेंदुआ ने 1988 में गोरंगघाटी के 14लोगों को अपना निवाला बनाया था। 31साल पहले पूरी गोरंगघाटी तेंदुआ के आतंक से परेशान थी। 1988में गुलदार ने क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में 14लोगों को मार डाला था। तब लोगों ने घरों से बाहर निकलना ही बंद कर दिया था। नरभक्षी तेंदुआ के आतंक से लोग घरों में कैद हो गए थे। आतंक का पर्याय बन चुके तेंदुआ को मारने के लिए अल्मोड़ा से शिकारी बुलाए गए थे। तेंदुआ की मौत के बाद गोरंगघाटी के लोगों को उसके आतंक से निजात मिली। इस बार भी सौगाड़ में फंदे में फंसे तेंदुआ ने वहां के लोगों को 31साल पुरानी खौफनाक घटना को याद दिलाने का काम किया है। ----------------- कोट- नियम के अनुसार मानसिक रूप से बीमार और परिवार से छोड़े गए लोगों के लिए तेंदुआ के हमले में मारने पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है। क्षेत्र की लोगों की सुरक्षा के लिए पिंजरा लगाया गया है। क्षेत्र में घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए तेंदुआ को आदमखोर घोषित करने की मांग को लेकर उच्च स्तर पर पत्र भेजा है। विनय भार्गव, डीएफओ, पिथौरागढ़। ---------- 22पीटीएच09 पी- सुकौली में घटना स्थल पर जमा ग्रामीणों की भीड़। 22पीटीएच10 पी- सुकौली में वन विभाग की टीम घटना की जानकारी लेती 22पीटीएच 11पी- सुकौली में इस स्थान पर सोता था मृतक। 22पीटीएच 12पी- मृतक (फाइल फोटो)
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