थल-सातसिलिंग सड़क पर 14 दिन बाद वाहनों के पहिए घूमे, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है। वाहनों की आवाजाही शुरू होने से लोगों को राहत मिली है तो नागनीमल की पहाड़ी से लगातार हो रहा भूस्खलन लोनिवि और प्रशासन की चिंता बढ़ा रहा है। पहाड़ी पर लटके बोल्डरों के गिरने का खतरा बना हुआ है और यात्री, वाहन चालक जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
बीते चार सितंबर को थल धारे के पास पहाड़ी दरकने से थल-सातसिलिंग सड़क का 100 मीटर हिस्सा रामगंगा नदी में समा गया था। सड़क पर आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई इससे क्षेत्र के लोगों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। लोनिवि ने पहाड़ी काटकर नई सड़क बनाने का काम शुरू किया लेकिन इसके लिए उसे कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार 14 दिन के लंबे इंतजार के बाद मंगलवार दोपहर सड़क पर आवाजाही शुरू कराई जा सकी।
सड़क पर वाहनों का संचालन तो शुरू हुआ है लेकिन नागनीमल की पहाड़ी से अब भी मलबा और बोल्डर गिर रहे हैं इससे खतरा बरकरार है। पहाड़ी पर बोल्डर लटके हैं इनके गिरने का खतरा बना हुआ है। खतरा बने बोल्डर कब हटेंगे, इसका स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं है। संवाद
नहीं लगाना होगा 20 किमी का अतिरिक्त फेरा
थल-सातसिलिंग सड़क पर आवाजाही बंद होने से थल, मुवानी, मुनस्यारी, तेजम, बेड़ीनाग, पांखू, बांसबगड़, धरमघर, क्वीटी, बिर्थी, गिनी बैंड सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों को बाया डीडीहाट सफर करना पड़ रहा था। 20 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाकर लोग थल पहुंच रहे थे। सड़क पर आवाजाही शुरू होने से क्षेत्र की बड़ी आबादी को राहत मिली है।
थल-सातसिलिंग सड़क पर आवाजाही शुरू करा दी गई है। सड़क खुलने से क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी। विभाग बंद सड़कों को खोलने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है।
- मुकेश जुकरिया, जेई, लोनिवि, पिथौरागढ़।