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Pithoragarh News: आज भी विकास से दूर है सीमांत जिला

Thu, 23 Feb 2023 11:03 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले का 24 फरवरी को 63वां जन्मदिन है। पिछले छह दशकों में भले ही इस जिले के कई गांवों ने नगरों का रूप ले लिया हो लेकिन आज भी जिले के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क सहित अन्य सुविधाओं के अभाव में पलायन से गांव खाली हो गए तो रोजगार के नाम पर खुली एकमात्र मैग्नेसाइट फैक्टरी बंद हो गई। शिक्षा से लेकर रोजगार तक के लिए शहरों की खाक छानना जनपद के लोगों की नियति बना हुआ है।
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24 फरवरी 1960 को अल्मोड़ा से अलग कर पिथौरागढ़ जिले का गठन हुआ था। जीवन चंद्र पांडेय जिले के पहले डीएम थे। नेपाल और चीन सीमा से सटा जिला बनने के बाद यहां के लोगों को जिस विकास की उम्मीदें थीं उसके अनुरूप विकास कार्य नहीं हुए। पिछले छह दशकों में सीमांत जिले में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं होने से गांवों से जबरदस्त पलायन हुआ।

सेना में प्रतिनिधित्व के मामले में पिथौरागढ़ जिला दूसरे स्थान पर है। इस कारण इस जिले को वीरों की भूमि भी कहा जाता है। इसके बावजूद जिले की 50 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को बेहतर यातायात की सुविधा नहीं मिल सकी है। तीन दशक पहले तक जिले में मैग्नेसाइट फैक्टरी रोजगार का एक जरिया थी। इस फैक्टरी से लगभग एक हजार लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता था।
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नए उद्योग धंधे खुलने तो दूर यह फैक्टरी भी बंद हो गई। गांवों से हुए पलायन के कारण पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, मुनस्यारी में कंक्रीट के जंगल उग आए लेकिन अनियोजित विकास के कारण लोगों को नगर में भी सुविधाओं के बजाय असुविधाओं के बीच रहना पड़ रहा है।

पिथौरागढ़ जिले से 41 फीसदी आबादी कर चुकी है पलायन
पिथौरागढ़। पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पिथौरागढ़ जिले के गांवों से 41 फीसदी से अधिक आबादी पलायन कर चुकी है। गांव छोड़ने वाले परिवार कस्बों या फिर नगरों में बस गए। हाल ही में जल जीवन मिशन योजना के तहत गांवों को पेयजल पहुंचाने के लिए सर्वे किया गया था। रिपोर्ट में 58 गांवों के गैर आबाद होने की पुष्टि हुई थी। वर्ष 2019 में पिथौरागढ़ में 1600 गांव आबाद थे। पलायन के कारण जिले में आबाद गांवों की संख्या घटकर 1542 पहुंच गई है। इसकी वजह पलायन कर चुके लोगों का वापस घर नहीं आना है। जिले में बेड़ीनाग विकासखंड के 41 और गंगोलीहाट के 17 गांव आबादी विहीन हो गए हैं। पलायन के पीछे के मुख्य कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार हैं। संवाद

शिक्षकों की कमी से जूझ रहे सरकारी स्कूल
पिथौरागढ़। जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का अभाव है। इस कारण जिन स्कूलों में कभी छात्र संख्या 800 से 1200 होती थी वहां 100 से 150 छात्र संख्या रह गई है। उच्च शिक्षा के लिए खोले गए मुवानी, गणाई गंगोली, गंगोलीहाट सहित अन्य महाविद्यालय आज भी टिन शेडों या दो कमरों के पुराने भवनों में चल रहे हैं। संवाद

इलाज के लिए जिला अस्पताल पर है पूरी निर्भरता
पिथौरागढ़। जिले की जनता आज भी इलाज के लिए जिला अस्पताल पर ही निर्भर हैै। जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद सात वर्षों से खाली है। जिले के ब्लाॅक या तहसील मुख्यालयों में खोले गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। ज्यादातर मामलों में मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। स्टाफ नहीं होने से जिला अस्पताल में हंस फाउंडेशन की ओर से बनाए गए आईसीयू का संचालन नहीं हो पा रहा है। बेस अस्पताल का निर्माण तो हो गया है लेकिन इसका अब तक संचालन नहीं हो सका है। संवाद

ये दिक्कतें भी हैं
- पिथौरागढ़, डीडीहाट, बेड़ीनाग में करोड़ों खर्च करने के बाद भी लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है।
- पिथौरागढ़ नगर में सीवर लाइन की सुविधा नहीं मिल सकी है। शहर की नालियों में सीवर बह रहा है।
- जिले की अधिकतर सड़कें बदहाल हैं। लोगों को जान जोखिम में डालकर आना-जाना पड़ता है। नगर की सड़कें कभी गड्ढा मुक्त नहीं हो पाती हैं।
- नवगठित तहसीलों में एसडीएम तो दूर नायब तहसीलदार तक तैनात नहीं हैं। अधिकतर तहसीलें प्रभारियों के भरोसे संचालित हो रही हैं।
- जिले में इस समय पंजीकृत वाहनों की संख्या 50 हजार से अधिक पहुंच चुकी है। वाहनों को पार्क करने के लिए नगरों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
- जंगली जानवरों से किसान त्रस्त हैं लेकिन किसानों को राहत देने के लिए अब तक ठोस नीति नहीं बन सकी है।
- पूरा जिला पर्यटन की दृष्टि से बेहद उपयुक्त है लेकिन मुनस्यारी, चौकोड़ी के अलावा पर्यटकों की पहुंच के कोई ठोस प्रयास नहीं हुए।

हवाई सेवा के बस सपने दिखाए
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में करोड़ों की लागत से एयरपोर्ट का निर्माण किया गया। यहां से सरकारें नियमित उड़ान शुरू नहीं कर पाई हैं। 22 मार्च 2020 को नौ सीटर विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से बाहर उतर गया था। तब से हवाई सेवा शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान में पवन हंस की हेली सेवा चल रही है। अधिक किराया और अनियमित संचालन के कारण आम लोगों को इस हेली सेवा का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। ऑलवेदर सड़क तो बनीं लेकिन बरसात में लोगों को मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है। जगह-जगह भूस्खलन के कारण सड़क बंद होने से देहरादून, दिल्ली के लिए 17 घंटे का सफर 24 घंटे का हो जाता है। संवाद

जन्मदिन पिथौरागढ़-
पिथौरागढ़ जिले का गठन- 24 फरवरी 1960
क्षेत्रफल- 7090 वर्ग किमी
कुल जनसंख्या- 483440
महिलाएं-244133
पुरुष- 239306
साक्षरता दर- 82.2
महिला साक्षरता- 72.3
पुरुष साक्षरता- 92.7
तहसील-12
उपतहसील- एक
ब्लाॅक- आठ
विधानसभा- चार
गांवों की संख्या-1600
प्रमुख पर्यटन स्थल- छोटा कैलाश, ओम पर्वत, बेड़ीनाग, चौकोड़ी, डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला, थलकेदार, चंडाक, ध्वज।
राष्ट्रीय उद्यान- अस्कोट वन्यजीव विहार।
नोट- आंकड़े वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार

पिछले 62 साल में या तो विकास की पूरी अवस्थापना नहीं बनीं। जहां अवस्थापना बनीं वहां व्यावसायिक और पेशेवर उपयोग नहीं हुआ। जिस कारण जिले में न तो स्वास्थ्य, शिक्षा की व्यवस्थाएं दुरुस्त हुई और न रोजगार सृजन ही हुआ है। 62 वर्षों के विकास के बाद भी पलायन जारी है। यह पलायन गांव से कस्बा, कस्बे से नगर और यहां से महानगर की तरफ जारी है। इसे रोकना जिला विकास की मुख्य वरीयता होना चाहिए। -बद्री दत्त कसनियाल, वरिष्ठ पत्रकार पिथौरागढ़

विकास के लिए छह दशक का समय बहुत होता है। विकास के दावे तो तमाम होते रहे लेकिन धरातल पर ठोस कार्य नहीं होने से जिला हर क्षेत्र में पिछड़ गया है। आज भी लोगों को मूलभूत सुविधाओं की मांग के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गांव से लेकर नगर तक लोगों को जरूरत का पानी नहीं मिल रहा है। संचार सुविधा से सीमांत के गांव नहीं जुड़ सके हैं। सड़कें बदहाल पड़ी हैं। व्यावसायिक शिक्षा के नाम पर खोले गए संस्थान उपेक्षित पड़े हैं। गांव की जमीनें बंजर हो गई लेकिन किसानों का सुधलेवा कोई नहीं है। -भगवान रावत, संयोजक जनमंच पिथौरागढ़।
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