बेड़ीनाग ब्लाक के पीपलतड़ में किसान अनानास के पौधों का इस तरह रोपण कर रहे हैं। संवाद
पिथौरागढ़। पहाड़ों में किसानों का पारंपरिक खेती के बजाय प्रायोगिक खेती की ओर रुझान बढ़ने लगा है। जिसमें किसानों को जिला प्रशासन का भी सहयोग मिल रहा है। जिले के तीन ब्लाक के चार गांवों का चयन अनानास की खेती के लिए किया गया है। मूल रूप से यह पश्चिम बंगाल, असोम, बंगाल सहित कई अन्य राज्यों में होता है लेकिन अब पिथौरागढ़ जिले के किसान भी अनानास का उत्पादन करेंगे। अनानास के उत्पादन के लिए 15 से 32 डिग्री तापमान और 100 से 150 सेंटीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है।
कनालीछीना विकासखंड के काली नदी के किनारे बसे घिंघरानी और बगड़ीहाट में किसान छोटे स्तर पर अनानास की खेती कर रहे थे। इधर बेड़ीनाग ब्लाक के पीपलतड़ और मूनाकोट ब्लाक के बड़ालू में अनानास उत्पादन की संभावना को देखते हुए डीएम रीना जोशी की पहल पर कृषि विभाग ने प्रस्ताव बनाया। जिसके बाद पश्चिम बंगाल से तीनों स्थानों के लिए 2100 पौधे मंगाए गए हैं।
बेड़ीनाग के पीपलतड़ गांव में 600 और मूनाकोट के बड़ालू गांव के लिए 700 पौधे पश्चिम बंगाल से मंगाए गए हैं। पीपलतड़ में 19 किसानों को 600 पौधे मिलने के बाद पौधरोपण शुरू कर दिया है। अन्य स्थानों पर भी जल्द पौधरोपण शुरू हो जाएगा। कनालीछीना विकासखंड के घिंघरानी और बगड़ीहाट में किसानों ने खुद पौधे तैयार किए हैं। उन्हीं किसानों से कृषि विभाग पौधे खरीदकर अनानास के रकबे को बढ़ा रहा है। उन्हें अन्य स्थानों से भी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
15 रुपये प्रति गड्ढे के हिसाब से किसानों को होगा भुगतान
पिथौरागढ़। अनानास के पौधे लगाने वाले किसानों को 15 रुपये प्रति गड्ढे की दर से मनरेगा के माध्यम से मिलेगा। इसके अलावा किसानों को समय-समय पर तकनीकी जानकारी भी दी जाएगी। डीएम रीना जोशी का कहना है कि सीमांत में कृषि के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। किसानों की आय दो गुनी हो इसके लिए कार्य किए जा रहे हैं।
कोट
कनालीछीना, बेड़ीनाग और मूनाकोट के चार गांवों में अनानास का उत्पादन किया जाएगा। जिसके लिए पश्चिम बंगाल से पौधे मंगाए जा रहे हैं। - रितु टम्टा, मुख्य कृषि अधिकारी पिथौरागढ़।
पीपलतड़ में 19 किसान अनानास का उत्पादन करेंगे। पौधे मिल गए हैं उन्हें लगाया जा रहा है। जिनकी अच्छी देखरेख की जाएगी। - मधु देवी, सचिव रहवासी किसान संगठन।