थल (पिथौरागढ़)। सत्याल गांव के लिए पिछले 40 वर्षों से अब तक कई पेयजल योजनाएं बन चुकी हैं। इसके बावजूद घरों में आज तक मूल स्रोत का पानी नहीं पहुंचा है। ग्रामीण गधेरे से बनी योजनाओं का पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
गांव के लिए बनी योजनाओं का नाम भले ही नैना देवी है लेकिन इन्हें भेलियागाड़ से जोड़ा गया है। गधेरे के इस पानी में हमेशा मिट्टी के साथ गंदा पानी आता है। ग्रामीण इस पानी का प्रयोग केवल बर्तन और कपड़े धोने के लिए करते हैं। पीने के लिए आज भी लोग मूल स्रोत के धारे पर आश्रित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या का समाधान नहीं होता है। पिछले साल घर-घर जल योजना बनी उसे भी गधेरे से ही जोड़ा गया है। व्यापारी प्रमोद उपाध्याय का कहना कि विभाग को मूल स्रोत से ही पानी की आपूर्ति करनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता सुनील सत्याल का कहना है कि नैना देवी के नीचे सड़क किनारे बड़ी टंकी का निर्माण कर उसमें मूल स्रोत का पानी जोड़कर उसके नीचे आने वाले सभी गांवों को पीने के पानी की आपूर्ति की जा सकती है। संवाद