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Pithoragarh News: 17 साल में भी नहीं बनी लमड़ा गांव के लिए तीन किमी सड़क

Tue, 26 Sep 2023 10:53 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। स्वीकृति के 17 साल में भी जिले के लमड़ा गांव के लिए तीन किलोमीटर सड़क नहीं बन पाई है। ग्रामीणों को तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण अब तक गांव से 48 परिवार पलायन कर चुके हैं।
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कनालीछीना ब्लॉक के लमड़ा गांव की दूरी ब्लाॅक मुख्यालय से पांच किमी है। गांव के लिए पिथौरागढ़-धारचूला एनएच पर स्थित कसपतिया से पैदल रास्ता जाता है। यहां तक लोग वाहन से पहुंचते हैं। इसके बाद गांव पहुंचने के लिए तीन किमी चलना पड़ता है। वर्ष 2006 में लमड़ा गांव के लिए तीन किमी मार्ग स्वीकृत हुआ था। यह सड़क कसपतिया-नैनी होते हुए लमड़ा तक प्रस्तावित है। 17 साल में वन भूमि हस्तांतरण का पेंच दूर नहीं हो सका है। ऐसे में लोगों को पैदल आवागमन में दिक्कतें होती हैं। लोग खाद्यान्न सहित अन्य जरूरी सामान कनालीछीना बाजार से पीठ पर ढोकर गांव तक पहुंचाते हैं। गांव में उत्पादित अनाज को पिसाई के लिए कनालीछीना पहुंचाना पड़ता है।
जंगल के रास्ते करनी पड़ती है आवाजाही

पिथौरागढ़। लमड़ा गांव बागवानी और खेती की जाती है। अभी तक गांव के लिए सड़क नहीं बन पाई है। लमड़ा के लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए तीन किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। पहाड़ी को काटकर बनाए गए संकरे रास्ते में थोड़ी सी चूक होने पर खाई में गिरने का खतरा रहता है। यहां के लोग दो दशक से सरकार से सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। बच्चे, बूढ़ों को जंगल के रास्ते आवाजाही करनी पड़ती है। किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना कठिन हो जाता है। पहले गांव में 60 परिवार निवास करते थे। अब पलायन के कारण मात्र 12 परिवार ही रह गए हैं।
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लंबे समय से लमड़ा गांव के लिए सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। इसके बाद भी सड़क का निर्माण नहीं किया जा रहा है। सुविधा नहीं होने से लोगों को मजबूरन पलायन करना पड़ रहा है। सरकार को गांव तक सड़क पहुंचानी चाहिए। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र दिया जाएगा। हरीश उपाध्याय, पूर्व दर्जा राज्यमंत्री।

लमड़ा के लिए कसपतिया से सड़क स्वीकृत है। वन भूमि की सैद्धांतिक स्वीकृति नहीं मिल पाने से सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। मनीष खड़ायत, अपर सहायक अभियंता, लोनिवि अस्कोट।
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