पिथौरागढ़ में लाडली मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल होने से लोगों में आक्रोश।
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पिथौरागढ़ में लाडली के मामले में आश्वासन के चार महीने बाद भी पुनर्विचार याचिका दाखिल न होने से फिर से लोगों में आक्रोश है। लाडली के परिजनों और अन्य लोगों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। इनका कहना है कि सरकार लाडली को न्याय दिलाने के लिए गंभीर नहीं है। जल्द पुनर्विचार याचिका दाखिल न होने पर सभी ने फिर से आंदोलन का ऐलान किया है।
मंगलवार को पूर्व दायित्वधारी महेंद्र लुंठी ने पत्रकारों से वार्ता की। कहा कि सरकार की नाकामी से लाडली को न्याय नहीं मिल सका। कमजोर पैरवी से लाडली के साथ जघन्य अपराध करने वाले दोषी बरी हो गए। सरकार लाडली और उसके परिजनों को न्याय दिलाने में नाकाम रही। जब पूरे प्रदेश में जनआंदोलन शुरू हुआ तो सरकार ने लाडली के परिजनों को सर्वोच्च न्यायालय में जल्द ही पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का आश्वासन दिया। चार महीने बाद भी याचिका दाखिल नहीं हुई है जो सरकार की गंभीर लापरवाही है। साफ है कि सरकार बेटियों और महिलाओं के हितों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि अब लाडली के परिजनों के साथ ही हर बेटी, मां का हौसला जवाब देने लगा है। जल्द ही पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं हुई तो फिर से सीमांत जिले में बड़ा जनआंदोलन होगा, इसकी गूंज पूरे प्रदेश में होगी।
सरकार की नाकामी से लाडली को न्याय नहीं मिल सका। कमजोर पैरवी से लाडली के साथ जघन्य अपराध करने वाले दोषी बरी हो गए। सरकार लाडली और उसके परिजनों को न्याय दिलाने में नाकाम रही। - महेंद्र लुंठी, पूर्व दायत्विधारी
सरकार की नाकामी से लाडली को न्याय नहीं मिला। हमें इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचने की जानकारी तक नहीं दी गई। सरकार की इस नाकामी के चलते दोषी बरी हो गए और लाडली को न्याय से वंचित होना पड़ा। सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के झूठे आश्वासन हमें दिए हैं। अब तक याचिका दाखिल नहीं हुई है। ऐसे में हमें न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरना होगा। जनता इसमें हमारा साथ देगी हमें पूरा विश्वास है। - तारा चंद, लाडली के ताऊ