पिथौरागढ़। आदलि कुशलि कुमाऊंनी मासिक पत्रिका की ओर से दो दिवसीय तृतीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन शुरू हुआ।
जिला पंचायत सभागार में लोक संस्कृति के जानकार पदमा दत्त पंत की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मुख्य वक्ता बीडी कसनियाल ने कहा कि कुमाऊंनी के प्राचीन शब्द विलुप्त हो गए हैं, उनके स्थान पर नए शब्दों का प्रयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के जरिए उन शब्दों को खोजा जाना चाहिए। कहा कि किसी भी सम्मेलन में कुमाऊंनी की सभी 13 बोलियाें का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। कसनियाल ने कहा कि कुमाऊंनी में जो शब्द हैं वह खेतिहर और पशुचारक समुदायों ने उत्पन्न किए हैं, वह वर्तमान में बदल गए हैं। इसकी वजह से कुमाऊं की मूलभूत संस्कृति का पता नहीं लगाया जा सकता है। कहा कि कुमाऊंनी भाषा में राष्ट्रीय और विश्व स्तरीय साहित्य का सृजन होना चाहिए तभी भाषा को गौरव मिलेगा और देश में पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि बगैर अच्छा साहित्य सृजन किए भाषा की पहचान नहीं बन सकती है। कहा कि कुमाऊं और गढ़वाल की बोलियों को समन्वित कर उत्तराखंड की एक भाषा बनाने की शुरुआत होनी चाहिए। आयोजक डाॅ. सरस्वती कोहली ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य दुदबोली कुमाऊंनी का प्रचार-प्रसार और संरक्षण करना है। संरक्षक डाॅ. अशोक पंत ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। संचालन चिंतामणि जोशी ने किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि महावीर रवाल्टा, विशिष्ट अतिथि नेपाल के पूर्व सांसद पूरन सिंह दयाल, डाॅ. पीताबर अवस्थी, कीर्तिबल्लभ शक्टा, मोहन जोशी, डाॅ. आनंदी जोशी, डाॅ. दीप चौधरी, डाॅ. प्रमोद श्रोत्रिय, डाॅ. आशा जोशी, नीरज जाेशी, नरेंद्र चंद, विप्लव भट्ट, मंजुला अवस्थी, डॉ.तारा सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।