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आपरेशन डेयर डेविल्स को एक साल पूरा, टीम लीडर अभी भी लापता

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नंदा देवी ईस्ट में लापता पवर्तारोही दल को खोजते आईटीबीपी की रैस्क्यू टीम। (फाइल फोटो)संजू पंत डीडीहाट - फोटो : AMAR UJALA
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संवाद न्यूज एजेंसी डीडीहाट (पिथौरागढ़)। लापता पर्वतारोहियों की खोज के लिए चलाए गए डेयर डेविल्स अभियान को एक वर्ष पूरा हो गया है। दुनिया के सबसे ख़तरनाक और पहले अभियान में आइटीबीपी के पर्वतारोहियों ने सात लापता पर्वतारोहियों के शवों को निकाल लिया था लेकिन टीम लीडर का आज तक पता नहीं लग पाया। पिछले साल पिथौरागढ़ के मुनस्यारी से निकला आठ सदस्यीय पवर्तारोही दल नंदा देवी ईस्ट से लापता हो गया था। जिसमें आठ दिन के दुनिया के सबसे जोखिम भरे रेस्क्यू आपरेशन से आईटीबीपी ने सात पवर्तरोहियों के शवों को लाने में सफलता प्राप्त की थी, परंतु एक साल बाद भी पवर्तारोही दल का लीडर आज तक लापता है। आईटीबीपी के डीआईजी व पवर्तारोही दल की खोज का जिम्मा संभाले एपीएस निंबाडिया बताते है कि यह रेस्क्यू दुनिया का सबसे कठिन व जोखिम भरा था, जिसे आईटीबीपी के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आठ दिनों में पूरा किया। इस कार्य के लिए आईटीबीपी को केंद्र सरकार ने पुरस्कृत भी किया। परंतु राज्य सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का कोई सम्मान एक साल बाद भी नहीं दिया गया जबकि इस आपरेशन का ग्राउंड नेतृत्व धारचूला के सोन गांव के निवासी व आईटीबीपी के सेनानी रतन सोनाल ने किया था। क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी का कहना है कि उनके द्वारा पूरी डेयर डेविल्स की टीम को पुरस्कृत करने की मांग कई बार की जा चुकी है। इस नंदा देवी में चार ब्रिटीश, दो अमेरिकन, एक आस्ट्रेलियन व एक भारतीय पवर्तारोही लापता हो गये थे। जिसमें से सात पवर्तारोही के शव आईटीबीपी ने रैस्क्यू कर दिये थे।
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