पिथौरागढ़ रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी बस। संवाद
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ रोडवेज डिपो के 58 बस के बेड़े में अधिकांश बस पहाड़ की सड़कों पर चलने लायक नहीं हैं। इस बेड़े में 15 बस नए मॉडल की तो अन्य पुराने मॉडल की बस हैं।
वर्ष 2022 में 72 बेड़े वाला रोडवेज डिपो बस की कमी से जूझ रहा है। वर्तमान में रोडवेज के पास 58 बस हैं। इसमें 15 बस 2019 मॉडल की हैं। जबकि 43 बस 2016 मॉडल की हैं। यह बस भी पहाड़ में दौड़ते-दौड़ते हांफने लग जाती हैं। कभी गेयर बॉक्स में खराब तो कभी कोई तकनीकी दिक्कत के कारण आए दिन यह बस रास्ते में खराब हो जाती हैं। यात्रियों के लिए 18 घंटे की दिल्ली, देहरादून की यात्रा कष्टदायी रहती है। सर्द मौसम में बस की खिड़कियां पूरी तरह हवा को नहीं रोक पाती हैं। कई बस की सीटें भी दुरुस्त नहीं हैं।
बस के संचालन में भी कमी
पिथौरागढ़। बस की कमी से जूझ रहा रोडवेज डिपो भी नियमित तौर पर 20 बस का संचालन नहीं कर पा रहा है। वर्ष 2022 में रोडवेज के पास 72 बस थी। तब डिपो 20 बस का नियमित संचालन करता था। 10 बस पहाड़ में चलने के मानक पूरे करने के बाद मैदानी क्षेत्रों में भेज दी गई। इसके बाद भी 20 बस का संचालन किया था, लेकिन विगत दो माह पूर्व 2019 मॉडल की चार बस बागेश्वर डिपो को भेज दी गई। तब से डिपो 18 बस का संचालन कर रहा है।
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बस को जांच के बाद ही संचालित किया जाता है। बिना जांच के कोई भी बस संचालित नहीं की जाती है। वर्तमान में 58 बस का संचालन किया जा रहा है।
रवि शेखर कापड़ी, एआरएम।