अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समंवय मंच ने लगातार दस माह तक एक दिन के वेतन की कटौती करने पर आपत्ति जताई है। मंच का कहना है कि इस कटौती से अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों और शिक्षकों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। मंच के संयोजक एससी पंत और मुख्य संयोजक एमसी जोशी ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए संकट को देखते हुए कर्मचारी और शिक्षक पूर्व में ही स्वेच्छा से मार्च में एक दिन का वेतन सीएम राहत कोष में जमा कर चुके हैं। इससे पहले प्रदेश सरकार ने चार प्रतिशत डीए की किस्त पर रोक लगा दी है। इससे प्रतिमाह आर्थिक नुकसान हो रहा है। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि अधिकांश कर्मचारियों ने बैंकों से एजुकेशन लोन लेकर अपने बच्चों को निजी संस्थानों से इंजीनियरिंग आदि कोर्स कराए गए हैं। कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन में रोजगार संबंधी समस्याएं पैदा हो गई हैं। एजुकेशन लोन का भुगतान भी कर्मचारियों को अपने वेतन से करना पड़ रहा है। इससे कर्मचारियों पर दोहरी मार पड़ रही है। संयोजक और मुख्य संयोजक ने मुख्यमंत्री से दस माह तक की जाने वाली एक दिन की वेतन कटौती और डीए कटौती से कर्मचारियों और शिक्षकों को मुक्त रखने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जो कर्मचारी सेवानिवृत हो रहे हैं डीए कटौती के कारण उन्हें अपनी पेंशन में काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।