पर्वतीय क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। वहां शिक्षक, शिक्षार्थियों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। पिथौरागढ़ जिले के 29 जीर्णशीर्ण विद्यालयों में 4,036 बच्चे पढ़ने के लिए मजबूर हैं। वहीं चंपावत जिले के 51 माध्यमिक विद्यालयों के 180 कमरे खतरे की जद में हैं। बरसात में इन भवनों के गिरने का खतरा अधिक था। इससे चिंतित अभिभावक विद्यालयों को ठीक करने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। इस कारण कई कमरे खाली कराने पड़े जबकि विभाग के पास इस मद में काफी बजट उपलब्ध है।
लोगो::::बदहाल शिक्षा व्यवस्था:::::
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के 29 जीर्णशीर्ण विद्यालयों में 4,036 बच्चे पढ़ने के लिए मजबूर हैं। इसके बाद भी जर्जर हाल हो चुके विद्यालय भवनों को ठीक करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
जिले में 215 हाईस्कूल और इंटर कॉलेज हैं। इनमें से जिलेभर में 29 विद्यालय जीर्णशीर्ण अवस्था में हैं। शिक्षा विभाग इन विद्यालयों को ठीक करने के लिए प्रस्ताव बना रहा है। जीर्णशीर्ण विद्यालयों में हल्की सी बारिश में छत टपकने लगती है। प्लास्टर उखड़ने के कारण दीवारों में दरार पड़ गई है।
इसके बाद भी विद्यालयों को ठीक करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। कुछ विद्यालयों को जिला योजना से ठीक कराया जा रहा है। कुछ विद्यालयों के राज्य योजना के तहत प्रस्ताव बनाए जा रहे हैं लेकिन इसे स्वीकृति मिलने का पता किसी को नहीं है।
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पिथौरागढ़ के जीर्णशीर्ण विद्यालय
जीआईसी गुरना, बड़ाबे, मुवानी, ख्वांकोट, खेत, गलाती, खेला, धारचूला, रांथी, जौलजीबी, कालिका, स्यांकुरी, खतेड़ा, गांधीनगर, नायल।
हाईस्कूल तोली, कनार, बड़ालू, सेलधूरा, दर, तल्लाधामी गांव, ढूंगातोली, कुनलता, नालीवेल, बुरसुम, बटगेरी।
जीजीआईसी कनालीछीना, गणाई गंगोली, गंगोलीहाट।
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छात्राओं के बैठने के लिए जगह नहीं
गंगोलीहाट। जीजीआईसी गंगोलीहाट का भवन जर्जर हालत में है। विद्यालय में कुल 173 छात्राएं हैं लेकिन उनके बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। वहां रसायन विज्ञान, हिंदी, भौतिक विज्ञान और संस्कृत के प्रवक्ता के पद भी लंबे समय से खाली हैं। विद्यालय भवन की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई है। बीआरसी समन्वयक भीमराज भंडारी का कहना है विद्यालय भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। संवाद
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जीर्णशीर्ण विद्यालयों को ठीक करने के प्रस्ताव बनाए जा रहे हैं। कुछ विद्यालयों को जिला योजना से ठीक करने का कार्य किया जा रहा है। - हवलदार प्रसाद, डीईओ, माध्यमिक, पिथौरागढ़।
इनपुट:
खतरों के बीच भविष्य गढ़ने के लिए मजबूर चार हजार विद्यार्थी
चंपावत जिले के 51 माध्यमिक विद्यालयों के 180 कमरे खतरे की जद में
शिक्षा विभाग ने बजट की मांग के लिए अगस्त में भेजा खत
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। जिले के सबसे पुराने जीआईसी में से एक है लोहाघाट लेकिन यहां के भवन के जीर्णशीर्ण हाल से पढ़ने और पढ़ाने वालों के साथ ही अभिभावक भी सहमे रहते हैं। जीर्णशीर्ण कमरों से छात्रों का भविष्य गढ़ने की ये एक बानगी भर है। ऐसे हाल इस जिले के 51 माध्यमिक विद्यालयों के 180 कमरों में है।
लोहाघाट जीआईसी में 350 छात्र पढ़ रहे हैं लेकिन यहां 20 में से दस कमरों के हाल ठीक नहीं हैं। पुराने जीर्ण भवनों के अधिकतर कमरों की खिड़की, दरवाजे, जालियों, दीवारों में दरार से लेकर प्लास्टर और फर्श टूटा है। वैसे जिले में चार हजार से अधिक छात्र-छात्राएं जर्जर भवनों की वजह से मुश्किल हालत में पढ़ने के लिए मजबूर हैं। अभिभावक और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पढ़ाई से पहले छात्रों की सुरक्षा जरूरी है। विद्यालय के जर्जर भवन की शीघ्र मरम्मत की प्रशासन से लेकर शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से गुहार लगा चुके हैं।
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चंपावत जिले के संवेदनशील स्कूल
मऊ, पड़ासौसेरा, नेत्र सलान, डोबाभागू, रेगड़ू, बापरू, चौमेल, काकड़, लुवाकोट, सिंगदा, डुंगराबोरा, विविल, दिगालीचौड़, किमतोली, रौसाल, जानकीधार, चमदेवल, पुल्ला, रियासी, नरसिंहडांडा, गूंठ गरसाड़ी, गोली, चल्थी, मंच, रमैला, आमबाग, टनकपुर, सैलानीगोठ, पाली, सिप्टी, दियारतोली, दुबचौड़ा, बिरगुल, धूरा, बड़ौली, बिरगुल, धौन, सौराई, खेतीखान, लोहाघाट, चौड़ाकोट, रीठाखाल, मध्य गंगोल, धूनाघाट, भिंगराड़ा, टांण, बिनवालगांव, पनियां, देवीधुरा, कफड़ा, मूलाकोट।
तीन कोट सचित्र
उनके क्षेत्र के विद्यालय की हालत ऐसी नहीं है कि उनमें विद्यार्थी बैठ सकें लेकिन जगह की कमी से खतरों के बीच पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। - पूरन रावत, अभिभावक।
लधिया घाटी के कई स्कूल बुरे हाल में हैं। ऐसे विद्यालयों की मरम्मत के लिए ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने कई बार गुहार लगाई लेकिन मरम्मत नहीं हुई। - मदन परवाल, अभिभावक।
खतरे की जद वाले चंपावत जिले के स्कूल भवनों के लिए बजट की मांग की गई है। खतरे वाले कमरों में विद्यार्थियों को न बिठाने के निर्देश दिए गए हैं। - आरसी पुरोहित, सीईओ, चंपावत।