पिथौरागढ़। पूरा देश आजादी का अमृत काल के महोत्सव मना रहा है। कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जहां आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। आजादी को करीब से देखने वाले बुजुर्ग 15 अगस्त को लेकर उत्साहित तो हैं लेकिन आधुनिकता के दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में संचार सेवा और अन्य सुविधा नहीं होने से वह बेहद परेशान भी हैं। विकास तो हुआ लेकिन गांवों का विकास आज भी धीमा है। बुजुर्गों का कहना है कि गांवों को फिर से आबाद करने की जरूरत है। धन धान्य से भरे रहने वाले गांवों में अब युवा तो नहीं बस माटी से प्रेम करने वाले ही रह गए हैं। उन्हें आस है कि एक दिन गांव फिर से आबाद होंगे। आधुनिकता के दौर में गांव की याद लोगों को जरूर आएगी।
-
देश में हर क्षेत्र में विकास तो हुआ है, लेकिन आज भी गांव का विकास दूर है। सरकारों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात के स्तर काफी सुधरा है। एक जमाना था जब लोग कई किमी पैदल चलते थे लेकिन आज लोगों के घरों तक यातायात की सुविधा है। कुछ क्षेत्र अभी भी यातायात से वंचित हैं, लेकिन जल्द वहां भी सुविधाएं बेहतर होंगी।
डॉ. हीरा बल्लभ खर्कवाल, वड्डा।
आधुनिकता के इस दौर में कई गांवों में आज भी संचार सेवा नहीं है। सूचना देना काफी मुश्किल होता है। अपनों का हाल तो मुश्किल से मिल पाता है। सरकार को शहर से पहले गांवों को आबादी करने की योजना बनानी थी। आधुनिकता के दौर में लोग गांवों को भूल गए हैं। वीरान और सुविधाओं से वंचित गांवों में कोई रहना नहीं चाहता है।
आनंदी देवी, घटधार, मुनस्यारी।
धन धान्य से भरे रहने वाले गांव आज वीरान हो गए हैं। अब गांव में सिर्फ बुजुर्ग ही बचे हैं। आज भी उम्मीद है कि गांव फिर से आजादी से पूर्व की तरह खुशहाल होंगे। आज हम आजादी का अमृत काल मना रहे हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं से वंचित गांव के लिए यह काल मायने नहीं रखता है। कई सुविधाओं के इंतजार में दुनिया से चले गए। माटी का मोह हर कोई नहीं समझ सकता है।
लीला देवी, डाडाबीसी, मुनस्यारी।