धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी में प्रस्तावित बोकांग बालिंग जल विद्युत परियोजना के विरोध में दारमा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत भवन मार्छा में बैठक की। इसमें डैम के विरोध में जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने कहा कि 24 जनवरी को ज्ञापन भेजा जाएगा। जरूरत पड़ी तो न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता शकुंतला दताल की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहां कि दारमा घाटी के कई गांव पहले से ही आपदा की मार झेल रहे हैं। टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसी) की प्रस्तावित 165 मेगावाट बोकांग बालिंग जल विद्युत परियोजना के बनने से दारमा घाटी में आपदा का खतरा बढ़ जाएगा।
समिति के उपाध्यक्ष जीवन सिंह मार्छाल ने कहा कि 24 जनवरी को एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा। फरवरी में जौलजीबी से प्रत्येक ग्राम सभा में समिति गठित कर जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
संरक्षक नारायण सिंह, अध्यक्ष पूरन सिंह ग्वाल, दान सिंह बोनाल, नरेंद्र सेलाल, छोरी देवी, पूरन सेलाल, मनोज नगन्याल, सुखराज चलाल, जयेंद्र फिरमाल, दिनेश चलाल, भजन ग्वाल आदि ने एकजुटता का आह्वान किया। उपाध्यक्ष जीवन सिंह और महासचिव नरेंद्र सिंह सेलाल ने संचालन किया। बैठक में सुनीता मार्छाल, सरस्वती चलाल, सरिता सेलाल, सविता बंग्याल, बिंद्रा फिरमाल सहित कई ग्राम प्रधान और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
दारमा में प्रस्तावित परियोजना का हम सभी ग्रामीण पूर्ण रूप से विरोध करते हैं। हमारी देवभूमि के साथ छेड़छाड़ से हमारी आस्था को नुकसान हो सकता है। इसे ग्रामवासी बर्दाश्त नहीं करेंगे। दारमा घाटी भारत-तिब्बत सीमा से लगी है। - जीवन मार्छाल, उपाध्यक्ष, दारमा संघर्ष समिति।
प्रस्तावित डैम बड़ी परियोजना है। इससे भविष्य में हमें भी जोशीमठ जैसे हालत देखनी पड़ सकती है। सरकार को अगर विकास करना ही है तो छोटी छोटी जलविद्युत परियोजनाएं लाएं और सीमांत में सोलर प्लांट लगाएं। - सुखराज सिंह चलाल, सक्रिय सदस्य, दारमा संघर्ष समिति।