भक्तदर्शन पांडेय, पिथौरागढ़। कोरोना महामारी के कारण महानगरों से पिथौरागढ़ जिले के 30 हजार से भी अधिक प्रवासी गांवों में लौट आए हैं। गांव लौटे प्रवासियों की यह आबादी जिले की तीन नगर निकायों की जनसंख्या से भी अधिक है। अभी लगभग 10 हजार लोगों के वापस लौटने की संभावना है। पिछले दो दशकों में पिथौरागढ़ जिले के 973 गांवों से बड़ी संख्या में लोगों ने शहरी क्षेत्रों के लिए पलायन किया था। पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पलायन करने वालों की तादात 31786 थी। इसके अलावा हजारों लोग ऐसे भी थे जिन्होंने अस्थाई तौर पर पलायन किया था। इसमें आजीविका के लिए पलायन करने वालों का प्रतिशत सर्वाधिक 42.81 था। लगभग पांच लाख की आबादी वाले पिथौरागढ़ जिले में पांच नगर निकाय पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला, गंगोलीहाट और बेड़ीनाग हैं। पिथौरागढ़ नगरपालिका को छोड़ दिया जाय तो शेष नगरपालिका और नगर पंचायतों की आबादी 7500 से 11 हजार ही है। कोरोना महामारी के कारण जिले के गांवों में 30 हजार से अधिक लोग लौट आए हैं। यह जनसंख्या तीन नगर निकायों की आबादी से भी अधिक है। अभी लगभग 10 हजार प्रवासियों के लौटने की संभावना है। ऐसे में प्रवासियों की संख्या जिले की चार नगर निकायों की आबादी के बराबर हो जाएगी। इतनी बड़ी संख्या में प्रवासियों के आने से गांवों में संसाधनों की कमी की समस्या हो सकती है। गांवों में पेयजल की आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौती होगी। आबादी में डेरा जमा चुके जंगली जानवरों से जन मानस की सुरक्षा के इंतजाम भी करने होंगे। अभी गांवों में लौटी आधी आबादी क्वारंटीन केंद्रों में रह रही है। जब पूरी आबादी गांवों में स्थित अपने घरों में पहुंचेगी तो कामगारों को रोजगार से लेकर उनको मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी का कहना है कि जो भी लोग गांवों में लौटे हैं उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रयास हो रहे हैं। गांवों में हर व्यक्ति को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।