डॉ ललित भट्ट, मनोचिकित्सक, बेस अस्पताल, पिथौरागढ़।
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पिथौरागढ़। पांच लाख की आबादी वाले हर घर में एक शख्स मानसिक अवसाद से जूझ रहा है। कई बार अवसादग्रस्त व्यक्ति अपने रोग को छिपाकर बीमारी को बढ़ाता है और अपनी जीवन को समाप्त करने जैसे कदम भी उठा लेता है।
आज की बदलती जीवन शैली और खानपान केवल शारीरिक रूप से कमजोर कर मानसिक रोगी भी पैदा कर रही है। घर से लेकर बाहर की समस्याओं के कारण लोग परेशान हैं। इससे मानसिक अवसाद बढ़ रहा है। इन समस्याओं से परेशान होकर वह आत्महत्या जैसे कदम उठाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर देता है। समस्या न बताने के कारण इस तरह की घटनाएं अक्सर बढ़ातीं हैं। पिथौरागढ़ बेस अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. ललित भट्ट ने बताया कि घर, ऑफिस, व्यापार, पढ़ाई समेत अन्य समस्याओं से जूझ रहे लोग खुश रहना भूल गए हैं।
व्यक्ति को अपने जीवन में मनोरंजन का साधन भी अपनाना चाहिए। समस्याओं के कारण अवसाद में रहने से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है। वह खुद समस्याओं को सोच सोच कर बीमारी को और भी अधिक बढ़ा देता है। परिवार के लोग अलग रहते हैं जिस कारण आपसी मेल-मिलाप समाप्त सा हो गया है। हर कोई अपनी पारिवारिक और अन्य समस्याओं में डूबा है। पारिवारिक समेत अन्य चिंताओं में डूबने के कारण उसके मन में बुरे विचार आते हैं। समाधान न मिलने पर वह आत्मघाती कदम भी उठा सकता है।
प्रतिदिन पहुंच रहे अवसाद से ग्रस्त 20 लोग
पिथौरागढ़। मनोचिकित्सक डॉ. ललित ने बताया कि 20 लोग रोजाना उनके पास उपचार के लिए आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर युवा हैं जो अपनी समस्याएं लेकर आ रहे हैं। कोई नशा, कोई पढ़ाई तो कोई नौकरी की समस्या से जूझ रहा है। कुछ लोग पारिवारिक कारणों से परेशान हैं।
समस्या के लक्षण
नींद न आना
भूख न लगना
चिड़चिड़ापन
नशे की लत
क्या करें
करीबी को अपनी समस्या बताएं।
मनोचिकित्सक की सलाह लें।
परिवार को समय दें।
मनोरंजन के साधन ढूंढें।