पिथौरागढ़। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. तारा सिंह ने कहा कि महिलाओं के साथ क्रूरता का व्यवहार न जाने कब से चला आ रहा है। इसके पीछे कहीं न कहीं पुरुष की एकाधिकार वाली मानसिकता है। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इन अधिकारों को पहचाने की जरूरत है।
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय महिला जननांग विकृति के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय शून्य असहिष्णुता दिवस पर एक पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. तारा सिंह ने कहा कि हमें मानवीय मूल्यों को समझना होगा। महिलाओं को उतना ही सम्मान देना चाहिए जितना पुरुष वर्ग खुद के लिए चाहता है। भारत में नारी के सम्मान में बहुत कुछ कहा जाता है लेकिन भ्रूण हत्या बड़ी संख्या में होती हैं। इससे बालिका संख्या का अनुपात काफी कम होता जा रहा है। प्रिंसिपल सिस्टर जेसी फर्नांडीज ने कहा कि बालिकाएं जितनी भी जागरूक और शिक्षित होगी उतना ही अपने प्रति होने वाली क्रूरता की घटनाओं का मुकाबला कर सकेंगी। बेटियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए। संवाद