धर्मार्थ अस्पताल के प्रबंधक स्वामी एकदेवानंद महाराज। संवाद
चंपावत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस मायावती आश्रम में ध्यान लगाएंगे वहां न कोई मंदिर है न मूर्ति और न यहां किसी तरह की पूजा-अर्चना होती है। यहां सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। आश्रम का धर्मार्थ अस्पताल सेवा की अद्भुत मिसाल है। 25 शैयाओं के इस अस्पताल में निशुल्क इलाज के साथ तीमारदारों को भी निशुल्क भोजन और रहने की व्यवस्था है।
ये सब साधकों के दान से होता है। जलने से मुंह के इलाज के लिए आई उषा भट्ट अस्पताल से ऑपरेशन के बाद प्रफुल्लित हो वापस गई। ये हाल कई अन्य मरीजों के भी थे। नेत्र, गायनी, सामान्य सर्जरी सहित कई बीमारियों को ठीक करने के लिए नियमित रूप से शिविर लगाकर सर्जरी होती है। हर साल दो हजार से अधिक ऑपरेशन किए जाते हैं।
धर्मार्थ अस्पताल के प्रबंधक स्वामी एकदेवानंद महाराज का कहना है कि मायावती आश्रम का मूल ही सेवा है। इस वजह से 1903 में खोला गया यह धर्मार्थ अस्पताल 120 साल बाद भी उसी भावना के अनुरूप कार्य कर रहा है। मरीजों की सेवा करना हमारी पूजा है, आश्रम उसे करने का प्रयास कर रहे हैं।