झूलाघाट (पिथौरागढ़)। बदहाल संचार सेवा के कारण सीमांत झूलाघाट क्षेत्र के लोग स्वास्थ्य सुविधा से भी वंचित हैं। इंटरनेट ठप होने से खून की जांच तक नहीं हो पाती है। जांच के लिए मरीजों को 30 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ जाना पड़ता है। नेपाल सीमा से सटे झूलाघाट और आसपास के गांव संचार के लिए बीएसएनएल के भरोसे हैं। बीएसएनएल के टावर से आए दिन सिग्नल गायब हो जाते हैं। ओएफसी केबिल कटने, बिजली गुल होने पर भी संचार सेवा बाधित हो जाती है। संचार के आए दिन खराब होने से लोगों को बातचीत से तो वंचित होना ही पड़ता है।
बैंक, पोस्ट ऑफिस में इंटरनेट ठप होने से लेनदेन भी नहीं कर पाते हैं। लचर संचार सेवाओं के कारण लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है। मोबाइल सेवा बाधित होने पर पूरे क्षेत्र के लोग आपात स्थिति में 108 एंबुलेंस का लाभ नहीं ले पाते हैं। इतना ही नहीं अब इंटरनेट सेवा बंद होने पर मरीज अस्पताल में खून की जांच तक नहीं करा पा रहे हैं। वर्तमान में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से होने वाली खून की जांच के लिए आधार नंबर और मोबाइल नंबर की भी जरूरत होती है। वड्डा और मजिरकांडा के बीच ओएफसी केबिल कटने से बुधवार से बृहस्पतिवार दोपहर तक संचार सेवा बाधित रही।
दो दिन तक इंटरनेट सेवा बाधित रहने से भारत के अमतडी़, सिमपानी, गेठीगाडा़, झूलाघाट, कानडी़, बनाडा़, खरक्यूडा़, जामीरपानी, भटेडी़, कानडी़, बलतडी़ के अलावा नेपाल से आए मरीजों को समय से खून की जांच रिपाेर्ट नहीं मिल पाई। डॉ. दिव्या नाथ ने बताया कि रक्त की जांच के लिए नमूने लेने के बाद रिपोर्ट ऑनलाइन निकाली जाती है। इसके अलावा दवा का वितरण और मरीजों की संख्या भी ऑनलाइन करनी होती है। इंटरनेट बाधित होने पर कामकाज प्रभावित होता है।
इंटरनेट संबंधी काम के लिए जाना पड़ता है नेपाल
झूलाघाट। झूलाघाट में संचार सेवा बाधित होने पर लोगों को नेपाली संचार कंपनियों की सिम का इस्तेमाल करना पड़ता है। जिनके पास नेपाल की सिम नहीं होती है उन्हें इंटरनेट संबंधी काम के लिए नेपाल जाना पड़ता है।