लोहाघाट के सुई पऊ गांव के छमनिया तोक में आइटीबीपी कार्यालय के पीछे जंगल में घूमता तेंदुआ।
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पिथौरागढ़ सीमांत जिले में नगर से लेकर गांवों तक तेंदुए की दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही है। कनालीछीना क्षेत्र में तेंदुए की दहशत से जीजीआईसी की छात्राओं का स्कूल आवाजाही करना मुश्किल हो गया है। रोजाना रास्ते और इसके आसपास दो तेंदुए नजर आने से छात्राएं दहशत में हैं। वहीं अभिभावकों को भी उनकी चिंता सताने लगी है।
कनालीछीना के सतगढ़ गांव से विकासखंड होते हुए जीजीआईसी को पैदल रास्ता जोड़ता है। इसी रास्ते से रोजाना 15 से अधिक छात्राएं स्कूल और घर आवाजाही करतीं हैं। गांव और रास्ते के आसपास लंबे समय से तेंदुए की सक्रियता बनी हुई है। रोजाना छात्राओं को विकासखंड कार्यालय, पीएचसी सहित आसपास के इलाकों में रास्ते के नजदीक दो तेंदुए नजर आ रहे हैं इससे उनमें दहशत है।
हालात यह है कि डर के कारण अभिभावक छात्राओं को खुद स्कूल छोड़ने और घर ले जाने के लिए आ रहे हैं। सतगढ़ गांव और इसके आसपास तेंदुए ने बीते दो सप्ताह के भीतर तीन पालतू कुत्तों और दो गाय को अपना निवाला बनाया है। अभिभावक हेमा देवी, भुवन चंद्र, नीमा देवी आदि ने कहा कि यदि तेंदुए से निजात नहीं मिली तो भविष्य में कोई बड़ी घटना हो सकती है। वन विभाग को तेंदुए से निजात दिलाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। वहीं रेंजर सुरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जल्द ही टीम भेजकर तेंदुए की सक्रियता का पता लगाया जाएगा।