पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट विकासखंड मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर खेती गांव में शनिवार शाम आंगन में खेल रहे 10 साल के बच्चे को तेंदुआ ने मार डाला। जानकारी के मुताबिक, शनिवार शाम चार बजे खेती गांव में 10 वर्षीय रियांशु पुत्र भगवान राम अपने घर के आंगन में खेल रहा था। तभी घात लगाए तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया और उसे जबड़े में उठाकर जंगल की ओर ले गया। तेंदुए के हमले के समय बच्चे की दादी ही घर पर थी। उनके शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और जंगल की तरफ दौड़े। बच्चे की खोजबीन शुरू की। घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर बच्चे का शव पड़ा मिला। घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत है। ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति आक्रोश भी है।
सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हुई। वन दरोगा देवेंद्र सिंह मेहरा और पुलिस टीम के अकिल सिद्दीकी ने लोगों से सतर्क रहने और बच्चों को अकेले बाहर न छोड़ने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से तेंदुए की सक्रियता बनी हुई थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्राम प्रधान दान सिंह भंडारी ने बताया कि कुछ समय से गांव में तेंदुआ दिखाई दे रहा था। इसकी सूचना जिलाधिकारी और वन विभाग को पत्र के माध्यम से दी गई थी। प्रशासन की उदासीनता के कारण गांव में यह दर्दनाक घटना हुई है। ग्रामीणों ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है। वन दरोगा देवेंद्र सिंह मेहरा ने कहा कि टीम गांव में गश्त कर तेंदुए की सक्रियता का पता लगा रही है। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए टीम मौजूद रहेगी। जल्द उचित कदम उठाए जाएंगे।
घटना के समय दादी के साथ था रियांशु
रियांशु के पिता भगवान सिंह मिस्त्री का काम करते हैं। घटना के समय घर में रियांशु के साथ केवल उसकी दादी थी। उसका 12 वर्षीय बड़ा भाई भी घटना के समय अपने दोस्तों के साथ था। बच्चे पर तेंदुए ने जब हमला किया तो वह चिल्लाया। उसकी दादी को जब तेंदुए के हमले का पता चला तो उन्होंने शोर मचाकर ग्रामीणों को आवाज लगाई लेकिन ग्रामीणों के पहुंचने तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्चे की मौत से परिजनों में कोहराम है। ग्रामीणों के जंगल में पहुंचने पर तेंदुआ बच्चे को छोड़ गया। ग्रामीणों को आशंका है कि अब तेंदुआ और भी हिंसक रुख अपना सकता है। संवाद
क्षेत्र में तेंदुए के हमले में लगातार जान गंवा रहे हैं लोग
गांवों में तेंदुए के हमले की लगातार घटनाएं सामने आई हैं। दो साल पहले विकासखंड मुख्यालय से एक किलोमीटर दूर कोठेरा गांव में तेंदुए ने सात साल के बच्चे की जान ले ली थी। वहीं भंडारीगांव में तीन साल पहले तेंदुए के हमले में आठ साल के मासूम बच्चे को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। फिर से इसी गांव के तोक खेतीगांव में तेंदुए ने 10 के बच्चे को मौत के घाट उतारा है। लगातार तेंदुए के हमले की घटनाएं सामने आई हैं। खेती गांव के ग्रामीणों ने कुछ दिन पूर्व ही तेंदुए की सक्रियता की सूचना देकर वन विभाग को आगाह कर दिया था। विभाग नींद से नहीं जागा और किसी बड़ी घटना का इंतजार करता रहा। ऐसा ही हुआ और विभाग के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते बच्चे को अपनी जान गंवानी पड़ी है। यदि समय रहते विभाग उचित कदम उठाता तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती। संवाद