हल्द्वानी। एक माह बीतने के बाद भी पर्वतीय जिलों में लंपी का खतरा टला नहीं है। यहां गोवंश में फैली लंपी बीमारी काबू में नहीं आ पा रही है। कुमाऊं के चारों जिलों में लंपी से अब तक 219 मवेशियों की मौत हो चुकी है, जबकि 1192 मवेशियों का अभी इलाज चल रहा है। चारों जिलों में अब तक कुल 286235 मवेशियों को टीके लगाए जा चुके हैं।
पिथौरागढ़-चंपावत में अब तक 152 पशुओं की गई जान
पिथौरागढ़-चपावत। चंपावत जिले में अब तक 127 और पिथौरागढ़ में 25 पशुओं की मौत हो चुकी है। इससे दूध के उत्पादन पर भी असर पड़ा है। पिथौरागढ़ में अब तक 94000 औ्रर चंपावत में 59160 मवेशियों का टीकाकरण किया गया है। पिथौरागढ़ में 456 और चंपावत में 371 पशु अब भी बीमार हैं। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले में 45 टीम टीकाकरण और दवा वितरण कर रहीं हैं। दोनों जिलों में कुल 258285 पशु हैं।
पिथौरागढ़ में 1.60 लाख मवेशी
पिथौरागढ़ जिले के आठ विकास खंडों में कुल 1.60 लाख पशु हैं। डिप्टी सीवीओ डॉ. पंकज जोशी ने बताया कि पशुपालन विभाग की ओर से नेपाल सीमा से लगे गांवों में पशुओं का तेजी से टीकाकरण किया जा रहा है। मई शुरुआती हफ्ते से ही पशुओं में लंपी बीमारी के लक्षण दिखने लगे थे। नैनीताल और ऊधमसिंह नगर से आए सात पशुधन प्रसार अधिकारियों के साथ ही विभाग की 30 टीम नेपाल सीमा पर स्थित गांवों में टीकाकरण में जुटी हैं। बीमार पशु को पूरी तरह ठीक होने में आठ से दस दिन का समय लग रहा है। नेपाल से पशुओं के आयात-निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध है।
चंपावत में 15 टीम टीकाकरण में जुटीं
चंपावत के सीवीओ डॉ. पीएस भंडारी ने बताया कि जिले में टीकाकरण के लिए 15 टीम बनाई गई हैं। बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में विभागीय टीम मौके पर भेजी जा रही है। जबकि सामान्य बीमार मवेशियों की दवा पशुपालक अस्पताल ले जा रहे हैं।
दुधारू मवेशियों के बीमार होने से चंपावत जिले में रोजाना औसतन दो हजार लीटर दूध के उत्पादन में कमी आई है। जिले के 11 पशु सेवा केंद्रों में पशु प्रसार अधिकारी नहीं होने से भी दिक्कत आ रही है। जिले में 79686 गाय और 18599 भैसें हैं। चंपावत जिले के 15 पशु अस्पतालों में से दो में डॉक्टर नहीं है। सबसे ज्यादा दिक्कत पशु प्रसार अधिकारियों की कमी से है। जिले के 23 पशु सेवा केंद्रों में से 11 में कोई कर्मी नहीं है।
पिथौरागढ़ जिले के ये इलाके ज्यादा प्रभावित
पिथौरागढ़ के डिप्टी सीवीओ डॉ. पंकज जोशी ने बताया कि मुनस्यारी के क्वीरीजिमिया, साईपोलो, समकोट और मूनाकोट के भटेड़ी में पशु बीमार है। इन जगहों पर टीकाकरण तेज किया जा रहा है।
इन 15 केंद्रों में हो रहा टीकाकरण
चंपावत, लोहाघाट, खेतीखान, पाटी, बाराकोट, टनकपुर, बनबसा, खेतीखान, चमदेवल, सिप्टी, चल्थी, नरसिंहडांडा, रेगड़ू, भजनपुर और इजड़ा।
अल्मोड़ा : जानवरों में बढ़ी रोग प्रतिरोधक क्षमता, घटी मृत्यु दर
क्रासर15 मवेशियों की हो चुकी मौत, 28 अब भी ग्रस्त
अल्मोड़ा। जिले के पशुपालकों के साथ ही पशुपालन विभाग के लिए भी राहत भरी खबर है। जानवरों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के कारण लंपी वायरस की चपेट में आए पशु इससे उबरने लगे हैं जिससे उनकी मृत्यु दर भी घटने लगी है। जिले में 1,090 जानवर इसकी चपेट में आए हैं। इनमें से 1,043 जानवर इससे उबर चुके हैं जबकि 19 जानवरों की मौत हुई है। अब भी 28 जानवर इससे जूझ रहे हैं।
पशुपालन विभाग के मुताबिक सोमेश्वर, सल्ट, लमगड़ा, दन्या क्षेत्र में अधिक जानवर लंपी से ग्रसित हुए हैं। पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक टीकाकरण के बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के बाद इसकी चपेट में आने के चार या पांच दिन के भीतर ठीक हो जा रहे हैं। पांच दिनों में एक भी जानवर की मौत इस वायरस से नहीं हुई है। इसे विशेषज्ञों ने सकारात्मक संकेत बताया है। संवाद
अल्मोड़ा के हर ब्लॉक में दो टीम कर रहीं टीकाकरण
अल्मोड़ा। जिले में पशुपालन विभाग की 22 टीम जुटीं हैं। हर ब्लॉक में दो टीम को टीकाकरण में लगाया गया है। जिले में एक लाख चालीस हजार गोवंश चिह्नित हैं। पशुपालन विभाग ने कुल 86,635 जानवरों का टीकाकरण किया है जबकि 53,365 जानवरों का टीकाकरण होना बाकी है। विभाग का दावा है कि एक सप्ताह के भीतर सभी जानवरों का टीकाकरण कर दिया जाएगा। संवाद
2000 लीटर घटना दुग्ध उत्पादन
अल्मोड़ा। जिला दुग्ध संघ के मुताबिक दो माह पूर्व तक जिले के विभिन्न हिस्सों से रोजाना बारह हजार लीटर से अधिक दूध दुग्ध संघ में पहुंचता था जो अब घटकर दस हजार लीटर रह गया है। संवाद
कोट-
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से जानवर तेजी से इस वायरस से ठीक हो रहे हैं। बीमार मवेशियों की मृत्यु दर घट गई है। इस बीमारी पर जल्द अंकुश लगने की उम्मीद है। -डॉ. डीके शर्मा, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, अल्मोड़ा।
बागेश्वर : 52 मवेशियों को निगल गया लंपी
बागेश्वर। जिले में लंपी की चपेट में आने से 52 मवेशियों की जान चली गई है। 337 मवेशियों का इलाज चल रहा है। जिले में अब तक 46,440 पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। जिले में 3869 मवेशी अब तक बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 3480 मवेशी इलाज के बाद ठीक हो गए हैं।
टीकाकरण के साथ बीमा भी करा रहा विभाग
बागेश्वर। प्रदेश के पशुपालन और जिले के प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा के निर्देश के बाद विभाग ने पशुओं का बीमा कराने का कार्य शुरू कर दिया गया है। पशुपालन विभाग एक वर्ष, दो वर्ष और तीन वर्ष की अवधि का बीमा करवा रहा है। बीमा में सामान्य और एपीएल वर्ग के लोगों को 60 प्रतिशत का अनुदान और एससी-एसटी, बीपीएल को 80 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। बीमा कंपनी की शर्तों के अनुसार पॉलिसी जारी होने के 21 दिन बाद ही पशु बीमा क्लेम की कार्रवाई शुरू हो सकेगी।
कोट
लंपी संक्रमण की रोकथाम के लिए पशु चिकित्सक गांव-गांव जाकर इलाज और जागरूकता फैला रहे हैं। रोजाना एक हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है। पशुपालकों को पशुधन बीमा के लाभ बताकर बीमा कराने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। -डॉ. कमल पंत, सहायक मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बागेश्वर।
लमगड़ा में जानवर का टीकाकरण करते पशुपालन विभाग के कर्मी। संवाद