शहादत - जहां से भी अंतिम यात्रा निकली शहीद अमर रहे के लगे नारे
जब तक सूरज चांद रहेगा शंकर तेरा नाम रहेगा
अमर उजाला ब्यूरो
पिथौरागढ़। उत्तरी कश्मीर के बारामूला के उड़ी और रामपुर सेक्टर में पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद गंगोलीहाट ब्लाक के नाली गांव निवासी नायक शंकर सिंह का सरयू नदी के घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। वहीं , मुनस्यारी ब्लाक के नापड़ गांव निवासी गोकर्ण सिंह का पार्थिव शरीर देर शाम भारी बारिश के बीच पैतृक आवास पहुंचा जिस कारण शहीद का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया। शहीद गोकर्ण का सोमवार को नाचनी में रामगंगा और भुजगड़ नदी के संगम पर सैन्य सम्मान के अंतिम संस्कार किया जाएगा।
रविवार को करीब 1.42 बजे गंगोलीहाट ब्लाक के नाली गांव निवासी शंकर का पार्थिव शरीर सेना के हेलीकाप्टर से दशाईथल हेलीपैड पर पहुंचा। इसके बाद पार्थिव शरीर को सेना के वाहन से शहीद के पैतृक गांव नाली पहुंचाया गया। शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही चारों ओर चीत्कार हो उठा। शहीद के पिता, माता और पत्नी पार्थिव शरीर से लिपटकर रोने लगे। गांव के लोग भी घरों की छतों से शंकर सिंह अमर रहे के नारे लगाते रहे। इसके बाद पार्थिव शरीर को रामेश्वर के पवित्र घाट में सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। शहीद के शव को उनके छोटे भाई सैनिक नवीन सिंह ने मुखाग्नि दी।
इधर, मुनस्यारी ब्लाक के नापड़ गांव निवासी शहीद हवलदार गोकर्ण सिंह का पार्थिव शरीर वायुसेना के हेलीकाप्टर से करीब दो बजे मुनस्यारी हेलीपैड पर उतरा। यहां से शहीद के पार्थिव शरीर को 72 किमी दूर पैतृक गांव नापड़ पहुंचाया गया। शहीद का शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। पार्थिव शरीर के देरी से पहुंचने के कारण शहीद का अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा।