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रं समुदाय के लोगों ने दार्चुला में जानवरों के साथ किया प्रदर्शन

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दार्चुला में जानवरों के साथ प्रदर्शन करते रं समुदाय के लोग। - फोटो : AMAR UJALA
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धारचूला (पिथौरागढ़)। लॉकडाउन के कारण झूलापुल बंद होने से नेपाल दार्चुला जिले में रहने वाले रं समुदाय के सैकड़ों लोग माइग्रेशन पर नहीं जा पा रहे हैं। छांगरु और तिंकर के 400 लोगों ने अपने जानवरों के साथ दार्चुला जिला कार्यालय में प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बता दें रं समुदाय के कुछ परिवार नेपाल के दार्चुला में रहते हैं। ये परिवार हर साल माइग्रेशन पर उच्च हिमालयी क्षेत्र में जाते हैं। छांगरू और तिंकर जाने के लिए इन परिवारों को पहले भारत में आना पड़ता है। प्रशासन की अनुमति के बाद धारचूला से तवाघाट, नजंग, मालपा, बुंदी और गर्ब्यांग होते हुए सीतापुल से नेपाल के छांगरू गांव जाते हैं। छह माह बाद फिर से धारचूला से ही वापस नेपाल के दार्चुला को लौट आते हैं। नेपाल से 70 किलोमीटर की दूरी और रास्ता बेहद दुरूह होने से यह परिवार भारतीय मार्ग से होकर माइग्रेशन करते हैं। नेपाल के इन रं समुदाय के परिवारों के रिश्ते भारत में रहने वाले रं समुदाय के परिवारों में होते हैं। इस बार लॉकडाउन में झूला पुल बंद होने से यह परिवार माइग्रेशन पर नहीं जा पा रहे हैं। इससे नाराज होकर नेपाल के दार्चुला के वार्ड अध्यक्ष अशोक सिंह बोहरा, व्यासी शोका समाज समिति के संरक्षक ललित बोहरा के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। वार्ड अध्यक्ष अशोक सिंह बोहरा ने बताया कि लॉक डाउन से माइग्रेशन को एक महीने की देरी हो गई है। बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी नेपाल प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। देरी के कारण खेतीबाड़ी भी नहीं हो पाएगी। इधर, नेपाल दार्चुला के सीडीओ यदुनाथ पौडेल ने बताया कि इस मामले की जानकारी नेपाल सरकार को दी गई है। इसके साथ ही भारतीय अधिकारियों से भी बातचीत हो रही है।
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