अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़। चीन सीमा तक सड़क बनना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हुआ है। सामरिक महत्व की तवाघाट-लिपुलेख सड़क के लिंक होने से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए सीमा की निगहबानी आसान हो गई है। अब सुरक्षा बलों के जवान और अधिकारी वाहनों से भी नियमित गश्त कर सीमा की निगरानी कर रहे हैं। चीन जहां भारतीय सीमा तक वर्षों पूर्व सड़क बना चुका था वहीं भारतीय क्षेत्र में सड़क नहीं थी। यहां के जवानों को सीमा तक पैदल ही आवागमन करना पड़ता था। इसके अलावा रशद और अन्य साजो सामान भी घोड़े- खच्चरों में सीमा तक पहुंचाना पड़ता था। भारत की ओर से चीन सीमा के लिए पिछले डेढ़ दशक से सड़क का निर्माण चल रहा था, लेकिन कठिन पहाड़ियों के कारण सड़क बनाने में विलंब होता रहा। आखिरकार बीआरओ ने अथक प्रयासों से इस साल लिपुलेख तक सड़क पहुंचा दी है। चीन सीमा के लिए बन रही सड़क का विगत आठ मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकार्पण किया था। घट्टाबगड़ से लिपुलेख तक लगभग 95 किलोमीटर सड़क बनने से पहली बार सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को सुविधा मिली है। सूत्रों के अनुसार सड़क बनने के बाद सुरक्षा बलों को वाहनों से गश्त में काफी मदद मिल रही है। इसके अलावा अधिकारी भी निरीक्षण के लिए आसानी से जा पा रहे हैं। सड़क बनने से सीमा के लिए रसद और सैन्य साजो सामान पहुंचाना भी आसान हो गया है।