गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। डॉ. नसीम बानो और प्रवर सहायक हरीश उप्रेती पर करीब चार माह पूर्व लगे अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए सीडीओ नंदन कुमार, एसडीएम भगत सिंह फोनिया और सीएमओ डॉ. एचएस ह्यांकी सीएचसी गंगोलीहाट पहुंचे। सीडीओ ने आरोपी प्रवर सहायक से भी पूछताछ की। इस दौरान कमेटी को कई अनियमितताएं भी मिलीं। बाद में टीम ने व्यापार संघ, टीम एक कोशिश, चिकित्सकों और अस्पताल स्टाफ के साथ बैठक की।
शनिवार को गंगोलीहाट अस्पताल पहुंची जांच कमेटी ने अभिलेखों की जांच की। डॉ. नसीम बानो के तत्कालीन आवासीय कमरों का निरीक्षण किया गया तो वहां से हजारों रुपये की विभिन्न प्रकार की दवाइयां बरामद हुईं। व्यापार संघ के पदाधिकारी और टीम एक कोशिश के सदस्यों ने सीडीओ को बताया कि डॉ. नसीम बानो का पति अपने कमरे से मरीज को दवाइयां बेचा करता था।
व्यापार संघ और टीम में कोशिश ने सीडीओ से स्थायी प्रभारी चिकित्साधिकारी की नियुक्ति और सीएचसी में ट्रांसफार्मर लगवाने की मांग की जिससे एक्सरे मशीन संचालित हो सके। उन्होंने गंगोलीहाट में आधार केंद्र खोलने की मांग भी की। सीडीओ ने जांच के बाद बताया कि अभिलेखों में अनियमितताएं पाई गई हैं। चिकित्सक के कमरे में पाई गईं दवाइयां का ब्योरा तैयार किया जा रहा है। विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर डीएम को सौंपी जाएगी।
बता दें कि सीएचसी में अनियमितताओं को लेकर चार माह पूर्व व्यापार संघ और टीम एक कोशिश ने आंदोलन किया था। आंदोलन के बाद पूर्व में सीएमओ डॉ. एचसी ह्यांकी ने जांच की थी। इसके बाद डीएम रीना जोशी ने जांच के आदेश सीडीओ को दिए थे। शनिवार को सीडीओ ने सीएचसी में पहुंचकर सभी जांच रिपोर्ट देखी और जांच रिपोर्ट तैयार की। संवाद
ट्रांसफार्मर लगाने का प्रस्ताव भेजा
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। गंगोलीहाट सीएचसी में धूल फांक रही डिजिटल एक्स-रे मशीन के संचालन की उम्मीद जग गई हैं। अस्पताल प्रबंधन समिति ने डेढ़ लाख रुपये की लागत के ट्रांसफार्मर लगाने का प्रस्ताव भेज दिया है। वर्तमान में लोगों को एक्स-रे के लिए 25 किमी दूर बेड़ीनाग, 76 किमी दूर पिथौरागढ़ या फिर 110 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा अस्पताल जाना पड़ रहा है।
गंगोलीहाट सीएचसी में नवंबर में डिजिटल एक्स-रे मशीन स्थापित की गई लेकिन ट्रांसफार्मर न होने के चलते मशीन का संचालन शुरू नहीं हो सका। गंगोलीहाट विकासखंड के साथ ही बेड़ीनाग क्षेत्र की जनता भी सीएचसी पर निर्भर है। एक्स-रे जांच शुरू होने के बाद यहां की 48 हजार से अधिक की आबादी को लाभ मिलेगा। ट्रांसफार्मर लगाने का मामला स्वास्थ्य विभाग और यूपीसीएल के बीच लटका हुआ था। अब ट्रांसफार्मर का प्रस्ताव तैयार हो जाने के बाद मशीन संचालन नए साल पर होने की उम्मीद जगी है। सीएमओ डॉ. हीरा सिंह ह्यांकी ने बताया कि जल्द ही ट्रांसफार्मर लगाने की कार्यवाही की जाएगी। यूपीसीएल विभाग से समन्वय स्थापित कर काम पूरा कर लिया जाएगा।
फोटो विवरण-30पीटीएच 20पी- गंगोलीहाट सीएचसी में जांच के बाद विभिन्न संगठनों के साथ बैठक करती कमेटी। संवाद
विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी से जूझ रहा लोहाघाट उप जिला अस्पताल
पड़ताल
विशेषज्ञ चिकित्सकों के छह पद हैं रिक्त, पांच चिकित्सक उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए गए हैं बाहर
वर्ष के अंतिम कार्यदिवस पर बहुत कम रोगी पहुंचे अस्पताल
नवल जोशी
लोहाघाट (चंपावत)। तीन विकासखंड (बाराकोट, पाटी और लोहाघाट विकासखंड) के लोगों का इलाज करने वाला और जिले का सर्वाधिक ओपीडी वाला उप जिला अस्पताल मात्र रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का खामियाजा यहां के रोगियों को भुगतना पड़ रहा है। वर्ष 2023 के अंतिम कार्य दिवस पर अमर उजाला संवाद टीम ने उप जिला अस्पताल की पड़ताल की तो मरीजों की संख्या काफी कम दिखी। करीब 150 मरीज इलाज के लिए आए। उनका इलाज करने के लिए नौ चिकित्सक तैनात थे।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विराज राठी और ईएनटी सर्जन डॉ. इशान चौधरी बहुउदेश्यीय शिविर में गए थे। विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने से रोगियों को बाहरी अस्पतालों की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। निरीक्षण के दौरान गुमदेश से पार्वती, सीता, पंचेश्वर से कलावती और रीठा साहिब से चंचला अल्ट्रासाउंड कराने आई थीं लेकिन अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लगा हुआ था। ऐसे में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
बरदाखान के परमानंद पोते के हाथ में लगी चोट का इलाज कराने पहुंचे थे। हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने से वह बच्चे को निजी अस्पताल ले गए। बता दें कि अस्पताल में सामान्य तौर पर 300 से अधिक ओपीडी होती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के न होने से बाहरी अस्पताल में इलाज कराने पर गरीबों की जेब पर ज्यादा मार पड़ती है। संवाद
टाइम लाइन
सुबह 9:00 बजे से अस्पताल में रोगियों के आने का क्रम शुरू हुआ।
9:15 बजे चिकित्साधीक्षक ने अस्पताल का निरीक्षण किया।
10:30 बजे तक इंजेक्शन कक्ष में पांच मरीजों को इंजेक्शन लग चुका था।
11:00 बजे अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा हुआ था।
11:10 बजे तक 65 मरीजों ने दवा काउंटर से दवा ले ली थी।
11:30 बजे तक अस्पताल के पैथोलॉजी लैब में नौ लोगों की विभिन्न जांचें हो चुकी थीं।
11:45 बजे तक एक भी मरीज एक्स-रे कराने नहीं पहुंचा था।
12:11 बजे डॉ. प्रिया नगरकोटी 22 मरीजों का इलाज कर चुकी थीं।
12:15 बजे तक 92 मरीज इलाज के लिए पर्चा कटा चुके थे।
12:20 बजे तक अस्पताल में कोई भी मरीज इलाज के लिए भर्ती नहीं था।
अस्पताल में इन विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद हैं रिक्त
उप जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ, सर्जन, जनरल सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और पैथोलॉजिस्ट के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं।
अस्पताल में ये विशेषज्ञ हैं तैनात
नेत्र रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, निश्चेतक और रेडियोलॉजिस्ट अस्पताल में तैनात हैं।
कोट
अस्पताल के पांच चिकित्सक उच्च शिक्षा के लिए बाहर गए हैं। एमडी फिजीशियन डॉ. सोनू उपाध्याय, डॉ. चयनिका मेहता, डॉ. ज्ञानप्रकाश, डॉ. छाया बोहरा और डॉ. चित्रलेखा उच्च शिक्षा के लिए बाहर गई हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से लोगों के इलाज में काफी दिक्कतें हो रही हैं। उच्चाधिकारियों को लगातार विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए पत्र भेजे जा रहे हैं। - डॉ. सोनाली मंडल, उप जिला अस्पताल की चिकित्साधीक्षक, लोहाघाट।