बस से घर को आते पिथौरागढ़ के युवा।
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दिनेश अवस्थी (संवाद) पिथौरागढ़। गुजरात के राजकोट में कोरोना के चलते बेरोजगार हुए युवा बुधवार की रात दो बजे यहां पहुंचे। दो माह से परेशान युवाओं ने अपने-अपने ईष्ट देव का स्मरण कर सकुशल घर वापसी के लिए आभार प्रकट किया। युवा जांच के बाद नजदीकी स्कूलों में क्वारंटीन पर रह रहे हैं। सीमांत जिले के कई युवा विभिन्न राज्यों में होटलों में रोजगार कर परिवार का खर्चा वहन करते हैं। जिला मुख्यालय के नजदीकी गांव बैड़ा, थरकोट, रावल गांव, बिषाड़ के 46 युवा राजकोट में काम करते हैं। लाकडाउन के कारण वह पिछले दो माह से बेरोजगार हो गए। परेशान युवाओं ने पहले राजकोट प्रशासन से वाहन पास का अनुरोध किया। इसके बाद सभी युवा 12 हजार रुपये प्रति यात्री अदा कर बुधवार सुबह हल्द्वानी पहुंचे। युवाओं ने भाजपा नेता राजेंद्र भट्ट को हल्द्वानी पहुंचने की जानकारी दी। भट्ट ने परिवहन मंत्री यशपाल आर्य से बात कर उनके लिए भोजन और बस की व्यवस्था कराई। रात दो बजे सभी सकुशल यहां पहुंचे। बेड़ा के राहुल सिंह मेहता (25) ने बताया कि वह चार वर्ष पहले घर से निकले। पिता खेती करते हैं। वह कमाने लगे तो घर की आर्थिक स्थिति भी संभलने लगी। बताया कि वह इटेलियन कुक का काम करते हैं। हर माह 40 हजार रुपए तक कमा लेते हैं। राहुल ने बताया कि सभी युवा 20-35 साल के हैं। अधिकांश युवा तीन-चार साल बाद अपने घर लौट रहे हैं। राहुल के साथी रावल गांव के निर्मल, विजय रावल भी घर पहुंच बेहद खुश हैं। राहुल का कहना है कि यदि यहीं रोजगार मिले तो अच्छा है, नहीं तो हालात ठीक होने के बाद वह फिर वापसी करेंगे। उन्होंने सरकार से युवाओं के रोजगार की व्यवस्था किए जाने का अनुरोध किया है।