पिथौरागढ़। करीब पांच लाख से अधिक की आबादी वाले जिले में लोगों के उपचार के लिए हृदय रोग विशेषज्ञ और न्यूरो सर्जन उपलब्ध नहीं हैं। किसी को दिल का दौरा पड़े या फिर दुर्घटना में गंभीर चोट लगने पर हल्द्वानी, बरेली, दिल्ली आदि शहरों में जाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल पर जिले की आठ विकासखंडों पांच लाख से अधिक की आबादी निर्भर है। जिले की सीमा से सटे चंपावत के गांवों समेत पड़ोसी देश नेपाल से भी यहां मरीज आते हैं। इसके बावजूद जिला अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। हृदय रोग विशेषज्ञ और न्यूरो सर्जन की कमी सबसे अधिक खलती है।
दिल का दौरा पड़ने या सिर पर चोट लगने पर मरीजों को हायर सेंटर का ही भरोसा रहता है। किसी व्यक्ति के सिर में चोट लगने पर मरीज का बेस अस्पताल में सीटी स्कैन तो किया जाता है लेकिन रक्तस्राव होने या थक्का बनने पर उपचार नहीं मिल पाता। ऐसे में मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है।
तब अधिकतर लोग हल्द्वानी, बरेली, दिल्ली जाते हैं। इस यात्रा में सात से आठ घंटे का समय लग जाता है। ऐसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों का जीवन संकट में पड़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग हृदय रोग विशेषज्ञ और न्यूरो सर्जन के लिए शासन से लगातार पत्राचार कर रहा है लेकिन इनमें से किसी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है।
..........इनसेट कोट
विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। शासन स्तर से ही हृदय रोग और न्यूरो सर्जन विशेषज्ञ की तैनाती संभव है। - डॉ. हीरा सिंह ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।