अस्कोट (पिथौरागढ़)। बाबा महाकाल गिरि 1556 में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आए। उन्हें काली-गोरी नदी के सूरज कुंड के पास स्थित भूखंड तपस्या के लिए भा गया। इस पर वह कुंड से 500 मीटर की दूरी पर धूनी रमाकर तपस्या में लीन हो गए।
क्षेत्र में बाबा को धूनी रमाए बैठे होने की खबर गांवों में फैल गई। ग्रामीणों ने बाबा के लिए घास-लकड़ियों से कुटिया का निर्माण कर दिया। अस्कोट रियासत के तत्कालीन राजा पुष्कर पाल ने 1871 में क्षेत्र का दौरा किया तब तक वहां कई बाबाओं की समाधि लग चुकी थी। उस समय शंकर गिरि महाराज अपने शिष्यों के साथ धुनी रमाए मिले। राजा ने महाराज की कठिन तपस्या से प्रभावित होकर पत्तों के पूढ़े में रेत भर कर बाबा से कहा कि इस रेत यानी से जितनी जमीन में घेरा डालो वह दी जाएगी। बाबा ने रेत से जमीन में घेरा डाला।
राजा के कर्मचारियों ने जमीन की नाप-जोख की जो 272 नाली निकली। इस बीच राजा पुष्कर पाल का स्वर्गवास हो गया। शंकर गिरि महाराज भी समाधिस्त हो गए। उनके शिष्य हंस गिरि महाराज ने गद्दी संभाली। 1890 में राजा गजेंद्र पाल ने 272 नाली भूमि का दाननामा मठ के नाम कर दिया। 1999 में प्रेम गिरि महाराज के शिष्य महंत परमानंद गिरि महाराज ने गद्दी संभाली। महंत ने 468 साल के मठ का इतिहास संजोकर रखा है। इसका शीघ्र प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है। संवाद
मठ में आज भी प्रज्ज्वलित है अखंड धूनी
468 साल से मठ में अखंड धूनी प्रज्ज्वलित है। वह बताते हैं कि सिद्ध महात्माओं ने जमीन की घेराबंदी रातोंरात अपने तप बल से कर दी थी। 1996-97 में यह स्थान मोटर मार्ग से जुड़ गया था। जौलजीबी- टनकपुर मोटर मार्ग से जुड़ा होने से मठ में आवाजाही बढ़ गई है। बताया कि पूर्व में यहां 40 से 50 साधुओं के साथ सैकड़ों मवेशियों का पालन और बासमती धान के उत्पादन के साथ खूब खेतीबाड़ी का कार्य होता था। आम और केले की पैदावार अब भी काफी होती है।
बाक्स
सीएम धामी करेंगे माघ महोत्सव का उद्घाटन
अस्कोट। हंसेश्वर मठ के महंत परमानंद ने बताया कि 12 से 20 फरवरी तक तल्ला बगड़ स्थित मठ में 24 वें माघ महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। इस दौरान कलश यात्रा निकाली जाएगी। 14 फरवरी को वसंत पंचमी पर सूरज कुंड में शाही स्नान होगा और जनेऊ संस्कार संपन्न कराए जाएंगे। संवाद