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लॉकडाउन में मिली राहत, अब ग्लेशियरों ने रोकी राह, मुश्किल है माइग्रेशन की डगर

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दारमा घाटी के वुसुंग नाले में आई ग्लेशियर। - फोटो : AMAR UJALA
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संवाद न्यूज एजेंसी धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी के किसानों को लॉकडाउन में खेती के लिए मिली राहत से कोई फायदा नहीं होगा। रास्तों में ग्लेशियरों के कारण लोगों के गांवो में पहुंचने की राह ओर कठिन होती नजर आ रही है। बोन गांव के पूर्व प्रधान दान सिंह बोनाल ने बताया कि दारमा घाटी में लगभग 20 से 30 सालों के बाद इतनी अधिक बर्फबारी हुई है। नागलिंग से आगे दुग्तु तक सड़क में ग्लेशियर से सड़क बन्द है। बीडीसी मेंबर मनोज गवाल और सीपू प्रधान शांति देवी ने कहा कि सीपीडब्ल्यूडी ने दो स्थानों में ग्लेशियर को हटाया, उसके बाद वुसुंग नाले में जेसीबी मशीन खराब होने से पांच दिनों से काम रुका है। दांतु प्रधान जमन दताल और गो निवासी पूरन ग्वाल ने जानकारी दी कि नांगलिंग,बालिंग और दुग्तु के बीच कई जगहों पर बड़े बड़े ग्लेशियर आने से सड़क बंद है। इन ग्लेशियर में महिलाओं, बच्चों का जानवरों के साथ पैदल चलना काफी जोखिम भरा है। थोड़ी सी लापरवाही से धौलीगंगा में गिरने का डर बना रहता है। सीपीडब्ल्यूडी ने समय रहते ये सारे ग्लेशियर हटा दिए होते तो माइग्रेशन पर जाने में इतनी परेशानी नही होती। दारमा घाटी के लोगों में विभाग को लेकर काफी आक्रोश है। बोले अफसर ::: --- "प्रशासन की अनुमति से बॉलिंग से आगे दो स्थानों पर जमी बर्फ के ग्लेशियरों को हटाकर मार्ग खोल दिया गया है मशीन खराब होने के कारण काम रुका है। मशीन को बनाने का काम भी शुरू हो गया है। जल्दी ही मार्गो को खोलने का कार्य प्रारंभ हो जाएगा।" -कपिल कुमार जेई सीपीडब्ल्यूडी। ::: - "कार्यदायी संस्था को 15 मई तक उक्त सड़क को खोलने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वालों पर विभाग पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।" -अनिल कुमार शुक्ला उपजिलाधिकारी धारचूला। फोटो
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