मुवानी (पिथौरागढ़)। आजादी की लड़ाई लड़ने वाले मुवानी के मलाकोट निवासी स्व. प्रेम राम का नाम स्वाधीनता संग्राम सेनानियों की सूची में शामिल नहीं हो सका। ऐसे में उनके परिजनों को स्वाधीनता संग्राम सेनानी आश्रितों को मिलने वाली सरकारी मदद नहीं मिल सकी है। ग्राम मलाकोट निवासी शमशेर राम ने बताया कि उनके पिता स्व. प्रेम राम ने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आठ माह की जेल एवं कठोर कारावास की सजा भुगतने के बावजूद उनका नाम सेनानियों की सूची में शामिल नहीं हो सका है। उन्होंने बताया कि उनके पिता का निधन 25 जून 1965 को हो गया था। 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से पत्र भेजकर ताम्रपत्र लेने के लिए दिल्ली बुलाया गया था। उनके पिता के निधन और माता गोविंदी देवी को जानकारी न होने से ताम्रपत्र लेने कोई भी परिजन दिल्ली नहीं जा सका। पेंशन और अन्य सुविधा मिलने के इंतजार में उनकी मां का निधन भी 10 अक्तूबर 1988 को हो गया। शमशेर राम ने बताया कि शासन प्रशासन को लगातार पत्राचार के बाद भी मदद नहीं मिली है। उन्होंने डीएम को पत्र भेजकर उचित कार्रवाई का अनुरोध किया है।