पिथौरागढ़ में रंगकर्मी कैलाश कुमार से हस्तशिल्प की जानकारी लेते जनसंपदा विभाग के एचओडी। संवाद
पिथौरागढ़। आज पनी झूं-झूं भोल पनी झूं-झूं पोरखी ते न्है जूंला, स्टेशन संब पूजा दै मैले पछिल वीरान है जूंला... गीत को अपने मधुर कंठ से लोकप्रिय बनाने वाली लोकगायिक स्व. कबूतरी देवी पर इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट दिल्ली की ओर से किताब लिखने की तैयारी की जा रही है। इससे भविष्य में युवाओं को इस लोकगायिका के बारे में पूरी जानकारी मिल सकेगी।
कबूतरी का जन्म चंपावत के लोकगायक परिवार में हुआ था। उनकी शादी पिथौरागढ़ जिले के क्वीतड़ गांव में हुई थी। वर्ष 1970 के दशक में उन्होंने आकाशवाणी के लिए सौ से अधिक पहाड़ी गीत गाए। ऑल इंडिया रेडियो के रामपुर, नजीबाबाद, लखनऊ और मुंबई के केंद्रों से इन गीतों का प्रसारण होता था। उस दौर में लाखों लोग उनके मधुर कंठ के मुरीद थे। कबूतरी का निधन सात जुलाई 2018 को हुआ था।
इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट दिल्ली के जनसंपदा विभाग के अध्यक्ष डॉ. के अनिल कुमार और लक्ष्मी रावत शुक्रवार को दिल्ली से पिथौरागढ़ पहुंचे। उनके साथ काफल ट्री के सुधीर कुमार भी मौजूद थे। उन्होंने स्व. कबूतरी की बेटी हेमा के गांव कुम्डार जाकर जानकारी जुटाई।
यह दोनों शनिवार को लंदन फोर्ट स्थित भाव राग ताल नाट्य अकादमी में पहुंचे। उन्होंने रंगकर्मी कैलाश कुमार से मुलाकात कर पिथौरागढ़ की प्रसिद्ध हिलजात्रा पात्रों के मुखौटे और स्थानीय हस्तशिल्प के बारे में जानकारी लेकर सीमांत जिले में रंगमंच को आगे बढ़ाने के लिए कैलाश को भी सराहा।