पिथौरागढ़। बेस अस्पताल शुरू करने और नियमित हवाई सेवा शुरू करने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का क्रमिक धरना छठे दिन भी जारी रहा। डीएम के कहने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट परिसर से धरने को अधिसूचित धरना स्थल पर शिफ्ट कर दिया है। विधायक मयूख महर का कहना है कि सीएम से हुई फोन पर बात में उन्होंने दो टूक कह दिया है कि नियमित हवाई सेवा शुरू करने की तिथि निर्धारित कर दें और बेस अस्पताल में पदों को स्वीकृति देकर संचालन शुरू कर दें तो हम धरना समाप्त कर देंगे।
शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ता विधायक मयूख महर के नेतृत्व में अधिसूचित धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने यहां सरकार के खिलाफ नारे लगाकर प्रदर्शन कर आक्रोश प्रकट किया। इस दौरान धरने को स्टेट फ्रंटलाइन हेल्थ वर्क्स और सीमांत संघर्ष समिति ने समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सीमांत जिले के लोग लंबे समय से नियमित हवाई सेवा और बेस अस्पताल को शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
पूर्व दर्जा राज्य मंत्री महेंद्र लुंठी ने कहा कि नैनीसैनी हवाई पट्टी और बेस अस्पताल कांग्रेस के समय में बनकर तैयार हुआ जिसे भाजपा सरकार शुरू नहीं कर पा रही है जो निंदनीय है। विधायक मयूख महर ने कहा कि मुख्यमंत्री से उन्होंने दो दूक अपनी बात कह दी हैं। अगर सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है वे आंदोलन को उग्र कर देंगे। त्योहारों को देखते हुए नौ नवंबर तक धरना किया जाएगा। इसके बाद 16 नवंबर से क्रमिक और आमरण अनशन की तैयारी की जाएगी।
जनहित की मांगों के लिए उन्हें महीनों तक भी आंदोलन पर क्यों न करना पड़े, वह करेंगे। भुवन पांडेय के संचालन में हुए धरने पर पूर्व पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती, आप के महादेव भट्ट, होटल एसोसिएशन के राम सिंह बिष्ट, राजेंद्र सौन, सलीम खान, भूरेमियां असारी, मनोज बिष्ट, बिण ब्लाॅक के कनिष्ठ प्रमुख रोहित कोहली, हरीश उपाध्याय, तिलक जोशी, मुकेश पंत, केदार सेठी बैठे।
ये हैं प्रमुख मांग
नैनीसैनी हवाई अड्डे से देहरादून और दिल्ली के लिए नियमित हवाई सेवा शुरू करने।
बेस अस्पताल में पदों को सृजित कर संचालन शुरू करने।
यूकेएसएससी और यूकेपीएसी के परीक्षा केंद्र पिथौरागढ़ में बनाने।
जाजरदेवल- नैनीसैनी सड़क में डामरीकरण और नाली निर्माण करने।
सिकड़ानी के लोगों पर यूपीसीएल की ओर से दर्ज कराए मुकदमें वापस लेने।
सेना की ओर ग्रामीणों के बंद किए गोचर, पनघटों के रास्ते खोलने या वैकल्पिक रास्ते बनाने।