पिथौरागढ़ की पहाड़ियों में पैराग्लाइडिंग की शुरुआत 1990 में हो गई थी। तत्कालीन जिला पर्यटन अधिकारी पूनम चौधरी के प्रयास से नैनीताल के शोएब अहमद यहां हैंगग्लाइडर लेकर पहुंचे थे। उसी दौर में यूपी टूरिज्म ने यहां एक टीम भी भेजी थी। 1991-92 में यहां पर जापान के सर्वेयर आए थे। पंचाचूली हैंगग्लाइडिंग संस्थान ने यहां पर अपनी गतिविधियां शुरू की। तब यूक्रेन के प्रशिक्षक भी यहां पहुंचे थे।
देहरादून के स्काई सर्फर के पायलट शिव पैन्यूली ने यहां गोल्फ मैदान और बकरकटिया में पैराग्लाइडिंग के प्रशिक्षण कोर्स शुरू करवाए। 1993 से 1997 तक यहां पर पैराग्लाइडिंग के प्राइमरी, बेसिक और इंटरमीडिएट कोर्स चलते रहे। उससे आगे के कोर्स यहां पर नहीं हो पाए। पैराग्लाइडिंग के प्रशिक्षण अब भी चलते रहते हैं।
सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) के तहत हर साल एक दो प्रशिक्षण कार्यक्रम जरूर संचालित हो रहे हैं। एडवेंचर लवर्स एसोसिएशन ने इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को निरंतरता देने का प्रयास किया। उत्तराखंड पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के सचिव शंकर सिंह का कहना है कि नई पीढ़ी में पैराग्लाइडिंग को लेकर खासी उत्सुकता रहती है। हर प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हो रहे हैं।
पिथौरागढ़। हाल के दिनों में टेंडम ग्लाइडर का क्रेज बढ़ा है। टेंडम ग्लाइडर में एक पायलट और एक यात्री बैठता है। खासतौर पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए टेंडम ग्लाइडर का विचार दिया गया। अभी यहां पर पर्यटक इसे नहीं अपना रहे हैं। हालांकि यहां पर पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण दिलाने वालों की अच्छी खासी टीम तैयार हो चुकी है।
पिथौरागढ़। चंडाक को पैराग्लाइडिंग के लिए बेहतरीन स्पाट माना जाता था। चंडाक में मैग्नेसाइट फैक्टी के निकट से पायलट डिग्री कालेज मैदान में आसानी से आ जाते थे। तीन वर्ष पूर्व धौलीगंगा पावर प्रोजेक्ट की बिजली के लिए हाइटेंशन लाइन बिछने के बाद यह स्पाट लगभग समाप्त हो गया है। खतरे के कारण चंडाक से पैराग्लाइडिंग संभव नहीं होती।