पिथौरागढ़। आदलि कुशलि कुमाऊंनी मासिक पत्रिका के सौजन्य से मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने लोक परंपरा भिटौली के बदलते स्वरूप पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि भिटौली पहाड़ की एक ऐसी परंपरा है जो न केवल विवाहित पुत्री को अपने मायके से जोड़ती है बल्कि यह समाज में आपसी मेलजोल और रिश्तेदारी को जोड़े रखती है। उन्होंने कहा कि आज भले ही इस परंपरा को मनाने के तरीकों में बदलाव देखने को मिल रहे हैं लेकिन उसका उद्देश्य यथावत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आज के बदलते परिवेश में हमें भिटौली जैसी समृद्ध परंपरा को और अधिक विस्तार देना चाहिए। इस मौके पर अनीता जोशी, दिनेश पंत, डॉ. सरस्वती कोहली, डॉ. दीप चौधरी, पुष्कर सिंह खड़ायत, डॉ. आनंदी जोशी, मुन्नी पांडे, चिंतामणि जोशी आदि मौजूद रहे।