पिथौरागढ़। नंदा देवी और पंचाचूली में पर्वतारोही समय-समय पर पर्वतारोहण के लिए जाते हैं। नंदा देवी आरोहण के दौरान वर्ष 2019 में हिमस्खलन की चपेट में आकर सात पर्वतारोहियों की मौत हो गई थी। एक माह तक चले रेस्क्यू अभियान में सात सदस्यों के शव बरामद हो पाए थे।
13 मई 2019 को मुनस्यारी से नंदा देवी ईस्ट आरोहण के लिए निकले ब्रिटेन निवासी मार्टिन मोरिन, जोन चार्लिस मैकलर्न, रिचर्ड प्याने, रूपर्ट वेवैल, अमेरिका के एंथोनी सुडेकम, रोनाल्ड बीमेल, आस्ट्रेलिया की महिला पर्वतारोही रूथ मैकंस और इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन के जनसंपर्क अधिकारी चेतन पांडेय 26 मई को हिमस्खलन की चपेट में आने से लापता हो गए थे। 31 मई को हादसे में आठ सदस्यों के लापता होने और चार पर्वतारोहियों के सुरक्षित होने की सूचना एक पोर्टर ने प्रशासन को दी थी।
इसके बाद चार पर्वतारोहियों को रेस्क्यू किया गया और लापता पर्वतारोहियों की खोजबीन शुरू हुई। इसमें सेना, आईटीबीपी के कुशल पर्वतारोहियों की मदद ली गई। आईटीबीपी के द्वितीय कमान अधिकारी और एवरेस्ट विजेता रतन सिंह सोनाल के नेतृत्व में 18 सदस्यीय हिमवीरों की टीम ने 23 जून को सात पर्वतारोहियों के शवों को बरामद कर लिया। इसके बाद सभी शवों को पिथौरागढ़ लाया गया जहां से विदेशी पर्वतारोहियों के शव दिल्ली भेजे गए। एक पर्वतारोही का शव अब तक बरामद नहीं हो सका है।
आईटीबीपी के सात पर्वतारोही हुए थे लापता
पिथौरागढ़। वर्ष 2017 में चले नंदा देवी अभियान में आईटीबीपी के सात जवान लापता हुए थे जबकि इससे पहले पंचाचूली अभियान में भी आइटीबीपी के सात पर्वतारोही हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे। पर्वतारोहण के दौरान एवलांच के लिहाज से पंचाचूली और नंदा देवी की चोटियों को बेहद संवेदनशील माना जाता है।