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Pithoragarh News: संकटग्रस्त गिद्धों के घोंसला क्षेत्र संरक्षित करने की कवायद

Sat, 30 Sep 2023 11:12 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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लाल सिर वाला गिद्ध (रेड हेडेड)।
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड में संकटग्रस्त गिद्धों को सुरक्षित करने के लिए वन विभाग इनके प्राकृतिक वास स्थल चयनित करने की कवायद कर रहा है। सीमांत जिले में पांच प्रजाति के गिद्ध चिह्नित किए गए हैं। गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत स्तंभ हैं। यह मृत जानवर को खाकर प्रकृति की सफाई करते हैं। वर्ष 2005 में हुई गणना के अनुसार प्रदेश के संरक्षित क्षेत्रों में 1272 गिद्ध और संरक्षित क्षेत्रों से बाहर गिद्धों की संख्या 3794 पाई गई थी। वहीं पिथौरागढ़ जिले में 200 से ज्यादा गिद्ध होने का अनुमान है।
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पिछले कुछ वर्षों में गिद्धों की संख्या में काफी कमी आई लेकिन अब यह फिर से दिखाई देने लगे हैं। उप प्रभागीय वनाधिकारी ज्वाला प्रसाद गौड़ ने बताया कि बियर्डेड प्रजाति का गिद्ध मुनस्यारी और छियालेख के पास देखा गया है। इंजीप्शन गिद्ध झूलाघाट और मूनाकोट क्षेत्र में दिखे हैं। लाल सिर (रेड हेडेड) वाला गिद्ध गंगोलीहाट, मुवानी और बेड़ीनाग क्षेत्र में दिखाई दिया है।
उन्होंने कहा कि सीमांत जिले के लिए यह सुखद है कि यहां असुरक्षित श्रेणी में शामिल हिमालयन गिद्ध, 2200 मीटर की ऊंचाई से ऊपर दिखाई देने वाला बियर्डेड, इंजीप्शन, लाल सिर वाला और ग्रिफिन गिद्ध दिखाई दिए हैं। संवाद
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ऊंची उड़ान भरता है बियर्डेड गिद्ध
पिथौरागढ़। बियर्डेड गिद्ध (दाड़ी वाला) की सबसे बड़ी प्रजाति में गणना होती है। इसकी उड़ान भरने की क्षमता बेहतरीन होती है। वन विभाग के एसडीओ ज्वाला प्रसाद गौड़ ने बताया कि ऊंची पहाड़ियों पर जहां अन्य गिद्ध नहीं पहुंचते हैं वहां यह आसानी से पहुंच जाता है। इसके पंख बड़े होते हैं और सिर हल्का क्रीम कलर का होता है। संवाद
कोट
गिद्धों को सुरक्षित रखने के लिए उनके घोंसले के क्षेत्र चयनित किए जा रहे हैं। इनके प्राकृतिक वास स्थलों के आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। इस पहल से निश्चित तौर पर गिद्धों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी। - जीवन मोहन दगाड़े, प्रभागीय वनाधिकारी, पिथौरागढ़।
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