कनालीछीना (पिथौरागढ़)। कनालीछीना के लमड़ा गांव तक प्रस्तावित सड़क का विवाद सुलझ गया है। अब कसपतिया-नैनी होते हुए भनारीईजर से लमड़ा गांव तक सड़क का निर्माण हो सकेगा। कनालीछीना के लमड़ा गांव के लिए वर्ष 2007 में सड़क स्वीकृत हुई थी। नैनी से होते हुए लमड़ा गांव तक प्रस्तावित यह सड़क कहीं पर वन भूमि तो कहीं अलाइनमेंट के पेंच में फंस गई। इसके चलते 16 साल बीतने के बाद भी लमड़ा गांव अभी तक सड़क से नहीं जुड़ पाया है। यातायात सुविधा नहीं होने से यहां के लोगों को चार से पांच किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश उपाध्याय की पहल पर लोक निर्माण विभाग, राजस्व के अधिकारियों की मौजूदगी में लमड़ा और नैनी के ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से सड़क निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की बात कही गई। बैठक में तय हुआ कि मोटर मार्ग का निर्माण कसपतिया से नैनी होते हुए भनारीईजर से लमड़ा तक होगा। इस सड़क के बनने से लमड़ा, भनारीईजर और नैनी के ग्रामीणों को सुविधा मिलेगी। बैठक में शंकर दत्त उपाध्याय, प्रकाश उपाध्याय, त्रिलोचन उपाध्याय, प्रेम प्रकाश, हेमंत, कैलाश चंद्र, दीपक धामी, नारायण सिंह धामी, मंजू देवी, सरपंच मनोहर सिंह आदि ग्रामीण उपस्थित थे।
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सड़क नहीं बनने से अधिकांश परिवार कर चुके पलायन
कनालीछीना। लमड़ा गांव से नेशनल हाइवे तक पहुंचने के लिए लगभग चार किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। गांव तक जंगल से होकर पहुंचना पड़ता है। छोटी मोटी जरूरतों के लिए भी ग्रामीणों को कनालीछीना बाजार तक दौड़ लगानी पड़ती है। इन तमाम दिक्कतों का सामना करते हुए लमड़ा गांव के अधिकांश परिवार कनालीछीना, पिथौरागढ़ और हल्द्वानी शहरों में पलायन कर चुके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हरीश उपाध्याय ने बताया कि एनडी तिवारी शासनकाल में उन्होंने गांव के लिए सड़क स्वीकृत कराई थी।
कोट
कनालीछीना के लमड़ा गांव के लिए 3.80 किलोमीटर सड़क प्रस्तावित है। सड़क में वन विभाग की ओर से आपत्ति आई थी उसका निराकरण किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर जो आपत्तियां थीं उनका समाधान ग्रामीणों की बैठक में किया जा चुका है।
सुमित सैनी, जेई लोनिवि अस्कोट।
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