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भाजपा के डीडीहाट सांगठनिक जिले का नाम हटाने से नाराजगी

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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। डीडीहाट जिले की घोषणा को 12 साल पूरे हो चुके हैं। इतने वर्षों में दो बार भाजपा की सरकार बन चुकी है लेकिन भाजपा अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री की घोषणा को पूरा नहीं करवा सकी है। अब भाजपा ने अपने पुराने सांगठनिक जिले का नाम ही हटा दिया है। इससे लोगों में नाराजगी है। सांगठनिक जिला डीडीहाट का नाम हटाना क्षेत्र में चर्चाओं का विषय बना है।
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राज्य गठन के बाद भाजपा ने अपने संगठन के विस्तार के लिए डीडीहाट सहित कई स्थानों को सांगठनिक जिला बनाया था। इसके बाद भाजपा डीडीहाट जिले के जिलाध्यक्ष अपनी पूरी कार्यकारिणी के साथ कार्य करते रहे। वर्ष 2014 के बाद भाजपा के तत्कालीन केंद्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश पर भाजपा ने अपने संगठन के कई जिलों का नाम हटा दिया।
भाजपा ने प्रदेश के 13 जिलों में ही अपने जिलाध्यक्ष बनाए। वर्ष 2022 में एक बार फिर से भाजपा ने अपने सांगठनिक जिले बनाने की घोषणा की। इनमें से रानीखेत, कोटद्वार, काशीपुर, रुड़की, ऋषिकेश को सांगठनिक जिला बनाया गया लेकिन इस बार भाजपा ने डीडीहाट को अपने सांगठनिक जिले में शामिल नहीं किया है।
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लोगों का कहना है कि पहले भाजपा के तत्कालीन सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने 15 अगस्त 2011 को डीडीहाट को जिला बनाने की घोषणा की थी जिसे 12 साल में भी सरकारें पूरा नहीं कर सकी हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और डीडीहाट के विधायक बिशन सिंह चुफाल का कहना है कि नए सांगठनिक जिलों के गठन में उन जिलों को तोड़ा गया है जहां छह या उससे अधिक विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं लेकिन पिथौरागढ़ जिले में पांच विधानसभा क्षेत्र शामिल होने के कारण डीडीहाट को भाजपा के सांगठनिक जिले में नहीं लिया गया है।
हमेशा भारतीय जनता पार्टी ने डीडीहाट जिले के नाम पर जनता को गुमराह करने का काम किया है। भाजपा की घोषणा कोरी थी। अब संगठनात्मक तौर पर भी जिले को शामिल नहीं कर बता दिया है कि उसकी कथनी और करनी में अंतर है। भाजपा सिर्फ सत्ता पर राज करना चाहती है उसे जनता से कोई लेना देना नहीं है।
- प्रदीप पाल, पूर्व प्रदेश सचिव, कांग्रेस।
भाजपा -कांग्रेस ने राज्य को लूटने का काम किया है। यूकेडी ने राज्य गठन के दौरान छोटी-छोटी प्रशासनिक इकाई के गठन की मांग की थी। भाजपा ने 12 साल में डीडीहाट, रानीखेत, कोटद्वार और यमुनोत्री के नाम पर ठगने का काम किया है। भाजपा पूर्ण सत्ता में होने के बाद भी जिला नहीं बना पाई।
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- गोविंद लाल शाह, पूर्व केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य, यूकेडी।
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