पंचाचूली देखने पहुंचा विदेशी सैलानी वाईता। संवाद
धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी के चीन सीमा से सटे 14 उच्च हिमालयी प्रवास वाले गांवों में बर्फबारी के बाद मौसम सुहावना बना है। विदेशी पर्यटक के साथ ही स्थानीय पर्यटक भी पंचाचूली शिखर देखने पहुंच रहे हैं। अप्रैल में भी निचले इलाकों तक लगातार बर्फबारी होने से इस बार पर्यटकों के बड़ी संख्या में पहुंचने की उम्मीद है। इस पर होम स्टे संचालक भी काफी उत्साहित हैं।
ग्राम दांतू के हिमालय ब्लू शिप होम संचालक गुड्डू दताल ने बताया कि तीन दिन की बर्फबारी के बाद मंगलवार को धूप निकली। दारमा घाटी के लिए आने वाली सड़क खुली होने से पर्यटक आने लगे हैं। चेक गणराज्य से पंचाचूली दर्शन के लिए आए विदेशी पर्यटक उनके होम स्टे पहुंचे हैं। पर्यटक वाईता ने बताया कि वह मुनस्यारी घूमने गए थे। उन्हें दारमा घाटी में पंचाचूली की जानकारी मिली। इसके बाद वह दांतू गांव पहुंचे।
पंचाचूली ग्लेशियर देखने के बाद दारमा घाटी की प्राकृतिक सुंदरता की उन्होंने काफी सराहना की। कहा कि दारमा घाटी में सड़क और मूलभूत सुविधाओं में सुधार हो तो पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। गुड्डू ने बताया कि दारमा में सड़क खुली होने से पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो गई। घाटी में सोमवार से दोपहर के बाद मौसम खराब हो रहा है।
अप्रैल अंतिम सप्ताह से शुरू होगा माइग्रेशन
धारचूला (पिथौरागढ़)। सीमांत के दारमा और व्यास घाटी के गांवों के लिए अप्रैल अंतिम सप्ताह से माइग्रेशन शुरू हो जाएगा। दोनों घाटियों के लोग हर साल अप्रैल में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित अपने मूल गांवों में जाते हैं। वहां पर पशुपालन और खेती करने के बाद सितंबर के अंतिम सप्ताह तक लौटते हैं। पहले ग्रामीणों को पशुओं और सामान के साथ पैदल जाना पड़ता था। इसमें चार दिन से लेकर एक सप्ताह तक का समय लगता था। अब दारमा और व्यास घाटियों तक सड़क पहुंचने से प्रवास भी सुगम हो गया है।