पिथौरागढ़। दार्चूला नेपाल निवासी 67 वर्षीय भाना खत्री को अपना खोया हुआ बेटा 18 साल बाद मिल गया है। वह बेटे को नेपाल ले गई। बेटे से मुलाकात के दौरान मां की आंखें भर आई। उसका बेटा पिथौरागढ़ के होटलों में पानी भरने का कार्य करता था।
नेपाल के शैलशिखर नगर पालिका वार्ड नंबर सात दोबाट दार्चूला निवासी भाना खत्री परिजनों के साथ पिथौरागढ़ बैंक रोड पहुंचीं। उन्हें उन्हीं के गांव के एक व्यक्ति ने उनका 18 साल पहले खोए हुए बेटे धौल सिंह खत्री उर्फ सुनील डॉन (43) के पिथौरागढ़ में होने की जानकारी दी थी। जैसे ही भाना देवी पिथौरागढ़ बैंक रोड पहुंची तो वह बेटे को देखने के लिए आतुर थी। करीब दो घंटे के इंतजार के बाद उनका बेटा दिखाई दिया। बेटे को देखते ही वह उसके गले से लिपट गई।
धौल सिंह मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण परिजनों और मां को पहचान नहीं पाया। इस पर मां ने उसे उसके पिता, पत्नी, बेटे और बेटी की फोटो दिखाई और घर चलने का आग्रह किया जिसके बाद वह नेपाल चलने के लिए तैयार हुआ।
18 साल पहले दिल्ली से लापता हुआ था धौल
पिथौरागढ़। परिजनों ने बताया कि 18 साल पहले धौल सिंह खत्री दिल्ली से लापता हुआ था। दिल्ली में उन्होंने इसकी गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी लेकिन वह नहीं मिला। धौल सिंह के घर में मां के अलावा पत्नी चीमा खत्री, पुत्र जनक खत्री, पुत्री पार्वती खत्री और छोटा पुत्र कपिल खत्री है। परिजन धौल के घर आने की उम्मीद लंबे समय से लगाए हुए थे। संवाद
गांव के ही एक व्यक्ति को दिखा था धौल सिंह
पिथौरागढ़। धौल सिंह खत्री के गांव नेपाल का एक व्यक्ति कुछ दिन पहले पिथौरागढ़ के एक होटल में काम करने आया था। इस दौरान उसे वहां धौल सिंह खत्री दिख गया जिसके बाद वह नेपाल गया और परिजनों को जानकारी दी। इसके बाद वह उसकी मां भाना खत्री और चचेरे भाई भौज सिंह खत्री को पिथौरागढ़ लेकर आए जिसके बाद सभी उसे समझा-बुझाकर घर ले गए। संवाद
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फोटो विवरण-11पीटीएच16पी- पिथौरागढ़ में खोए बेटे के साथ मां भाना खत्री। संवाद